वो शाम याद है तुम्हें !
तुम बैठे थे बस स्टाप पर
मैं वहाँ आई और
तुम चले गये
एक बार भी मुड़कर
नहीं देखा तुमने मुझे !
मैं तुम्हारी इस बेरुखी से
नाराज हो गई
कारण जानना चाहती थी
तुम्हारी बेपरवाही का
फिर तुम्हारे दोस्त से
पता चला कि
तुम परेशान थे
थे कुछ हैरान क्योंकि
तुम्हारी प्यारी माँ
तुम्हें छोंड़कर जा चुकी थी
सारी नाराजगी दूर हो गई पर
मन आज भी खिन्न है
आह! तुम्हारी माँ को
आखरी विदाई* भी ना दे पाई मैं!!
माँ की आखिरी विदाई
Comments
6 responses to “माँ की आखिरी विदाई”
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बहुत खूब
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Thanks
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अति सुन्दर भवाभिव्यक्ति वाली रचना
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धन्यवाद
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Nyc
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Tq
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