माँ की दुआ

माँ हो साथ मेरे तो दुआ भी साथ देती है
जब तक हाथ सर पे है खता भी साथ देती है

जाने क्या असर है माँ के हाथो में खुदा जाने
ममता से खिला दे तो दवा भी साथ देती है

कुछ भी हो नही सकता भले तूफान हर सू हो
माँ जब सामने हो तो हवा भी साथ देती है

फैलेगीं हवाओं में बहारें इस कदर तेरे
माँ के साथ होने से फ़िजा भी साथ देती है

रहमत जान ले तू भी ‘लकी’ माँ की दुआओं की
सर पे हाथ रखते ही कजा भी साथ देती है

Comments

12 responses to “माँ की दुआ”

  1. Deepak Avatar

    Maan khubsurti ke har pahlu ka bakhubi varnan kiya. Bahut khub??

  2. 198126947436688 Avatar

    वाह बेहतरीन बेमिसाल रचना

  3. Pansy Avatar
    Pansy

    Suprb exquisite

  4. Raj Avatar

    Very nice thought for this poem

  5. राम नरेशपुरवाला

    Good

  6. Satish Pandey

    बहुत खूब

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