मां

खामोशी को समेटकर कुछ अल्फाजो का पिटारा लाया हूं,
उस ख़ुदा से भी बढ़कर है वो जिसके बारे में आपको कुछ बताने आया हूं।
उसकी हिदायतों से मैने जिंदगी के हर रंग में रंगना सीखा है,
उसका आशीर्वाद पाकर हर चुनौती से लड़ना सीखा है।
हमारी छोटी सी चोट को देखकर ही बड़ी आसानी से रो देती है,
शायद इसलिए हर इंसान के लिए उसकी मां भगवान से भी बढ़कर होती है।

वो मुझे जानती थी भी नहीं थी जब नौ महीने उसने मुझे अपनी कोख में पाला था।,
अपने सारे सपनों को छोड़कर , हर वक़्त उसने मुझे संभाला था।
वो आज भी मेरी ख्वाहिशों के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देती है,
शायद इसलिए हर इंसान के लिए उसकी मां भगवान से भी बढ़कर होती है।

उसने मेरे लिए ना जाने कितनी राते जागते हुए निकली होगी,
जब भी बाहर गया होउगा तो जाने कितनी शामे मेरे इंतजार में काटी होगी।
सच तो ये है कि वो हमेशा मेरे खातिर दिन रात एक कर देती है,
शायद इसलिए हर इंसान के लिए उसकी मां भगवान से भी बढ़कर होती हैं।

वो अक्सर मेरी बाते बिना शब्दों के समझ जाती है,
तो अपने जवाब भी वो बस इशारों में दे जाती है।
उसकी गोद में जाते ही हमारी ज़िन्दगी हमेशा महफूज़ होती है,
शायद इसलिए हर इंसान के लिए उसकी मां भगवान से भी बढ़कर होती है।

उसके चेहरे की वों खुशी एक अलग सा सुकून देती है,
उसके पास होने का एहसास मेरे जीवन को पूरा कर देती है।
उसके चरणों की धूल मंदिर और मदीना की चोखट से भी बढ़कर होती है,
शायद इसलिए हर इंसान के लिए उसकी मां भगवान से भी बढ़कर होती है।

Comments

4 responses to “मां”

  1. bhoomipatelvineeta Avatar
    bhoomipatelvineeta

    nice poetry sir

  2. Satish Pandey

    वाह वाह

  3. Satish Pandey

    बहुत सुंदर लिखा है

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