भारत के रक्षक

इतिहास है आज भी जिस पर मौन,
वह है आखिर कौन, वह है आखिर कौन?
जो लड़ता रहा हर समय किसी के लिए,
और मरता रहा किसी के लिए|
रहता है वो सबसे दूर,
देश के प्यार में है वो मजबूर|
दो देशों की ‘नेतागिरी’,
जिसमे है अब सेना ‘गिरी’|
जिसकी माँ करती उसके लिए हमेशा इंतज़ार|
बेटी कहती है बार बार,लगता है हो गये साल हज़ार आपका करे दीदार|
न जाने क्यों बटा है ये जहां,
जिसमे ली है लोगों ने पनाह|
हर देश की है अपनी सरहद,
पर एक माँ की ममता की कैसी हद?
कहते हैं अगर करोगे कोई रहमत,
तो मिलेगी दुनिया की हर खुशामत,
तो क्या रहमत किसी की जान बचाना नहीं होता?
या देश का सम्मान बचाना नहीं होता?
अगर होता है तो ऐ खुदा,
क्यूँ हो जाते हैं वो जुदा?
जो करते है अपनी जान कुर्बान,
बचाने इस देश का सम्मान|
माना खुदा रहमत से मिलता है स्वर्ग,
पर कौन ख़त्म करेगा एक माँ की आँखों का दर्द|
मिल जाता है उन्हें हर बड़ा सम्मान,
पर खो जाता है एक बेटी की ज़िन्दगी से बाप का नाम|
फिर भी जाते है सिपाही,भले ही दे दें अपनी जान|
इसीलिए तो कहते है अपना भारत महान|

Comments

6 responses to “भारत के रक्षक”

  1. bhoomipatelvineeta Avatar
    bhoomipatelvineeta

    thanks Neha ma’am

  2. Satish Pandey

    वाह वाह

  3. Abhishek kumar

    👏👏

  4. Pragya Shukla

    बहुत बहुत सुंदर पंक्तियां

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