माखनचोर ।

तू है माखनचोर।

कान्हा तुम आ जाते छुपके
खा जाते हो माखन चुपके,
तड़के आँगन सखियाँ करतीं शोर
तू है माखनचोर।

दही मगन खा मटकी तोड़ी
करते नहीं शरारत थोड़ी,
गाँव में अब चर्चा है हर ओर
तू है माखनचोर।

माखन नहीं अकेले खाते
बाल सखा सब लेकर आते,
शाम कभी तो आ जाते हो भोर
तू है माखनचोर।

माँ, माखन से मैं अनजाना
व्यर्थ गोपियाँ मारें ताना,
उनका तो बस मुझपर चलता जोर
मैं नहीं माखनचोर।

अनिल मिश्र प्रहरी।

Comments

10 responses to “माखनचोर ।”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत सुंदर

    1. Anil Mishra Prahari

      धन्यवाद।

  2. Geeta kumari

    वाह, बहुत सुंदर

    1. Anil Mishra Prahari

      धन्यवाद।

    1. Anil Mishra Prahari

      धन्यवाद।

    1. Anil Mishra Prahari

      धन्यवाद जी।

  3. Satish Pandey

    अतिसुन्दर

    1. Anil Mishra Prahari

      धन्यवाद।

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