Anil Mishra Prahari, Author at Saavan's Posts

दर्द।

दर्द। टूटकर सपने नहीं कम हो सके पास रहकर भी न उनमें खो सके, अश्क से दामन मेरा है तरबतर फूटकर हम आजतक न रो सके। दूर भी हैं वो हमारे पास भी मौत भी व जिन्दगी की आस भी, ठोकरें जिनसे मिलीं इस राह पर उन पत्थरों की आजतक तलाश भी। दर्द से रिश्ता बहुत मेरा पुराना धूप में तपता हुआ यह आशियाना, खाक न हो जाए दिल का ये चमन है पड़ा ही आँख को दरिया बनाना। रात क्या, दिन भी अँधेरों में घिरा आ सवेरा द्वार से मेरे फिर... »

पूस की रात।

पूस की रात। थरथरा रहा बदन जमा हुआ लगे सदन, नींद भी उचट गयी रात बैठ कट गयी। ठंड का आघात पूस की रात। हवा भी सर्द है बही लगे कि बर्फ की मही, धुंध भी दिशा – दिशा कि काँपने लगी निशा। पीत हुए पात पूस की रात। वृद्ध सब जकड़ गये पोर-पोर अड़ गये, जिन्दगी उदास है बची न उम्र पास है। सुने भी कौन बात पूस की रात। रात अब कटे नहीं ठंड भी घटे नहीं, है सिकुड़ गयी शकल कुंद हो गयी अकल। न ठंड से निजात पूस की रात।... »

सावन बीता जाये।

सावन बीता जाये प्रियतम तुम न आये। मस्त पवन संग डोले किसलय ताल – तलैया, सागर में लय, बादल नभ पर छाये प्रियतम तुम न आये। कलियों पर है छायी लाली झूमे बेसुध कोमल डाली, मधुकर तान सुनाये प्रियतम तुम न आये। चूमें धरती चंचल – किरणें महकी हवा लगी मन हरने, रुत आये रुत जाये प्रिमतम तुम न आये। सावन की ये काली रातें गरजे घटा घोर बरसातें, विरह बहुत तड़पाये प्रियतम तुम न आये। सूना आँगन , सूने झूले जा... »