पग मेरे नित चलते जाते। बचपन गाता जैसे मधुकर सुन्दर, सुखकर खुशियाँ भरकर, जीवन की अविरल धारा में बेसुध हो हम बहते जाते पग मेरे नित चलते जाते। यौवन आया ले स्वर्ण – जाल झूमे […]
पग मेरे नित चलते जाते। बचपन गाता जैसे मधुकर सुन्दर, सुखकर खुशियाँ भरकर, जीवन की अविरल धारा में बेसुध हो हम बहते जाते पग मेरे नित चलते जाते। यौवन आया ले स्वर्ण – जाल झूमे […]
अम्बर में अनगिन तारे हैं। रोज रात में खिल जाते हैं आपस में हिलमिल जाते हैं, रखते उर में वैर नहीं हैं मिलते जैसे गैर नहीं हैं। भूतल से लगते न्यारे हैं अम्बर में अनगिन […]
जलता जाए दीप हमारा। मिट्टी के दीपों में भरकर तेल – तरल और बाती, तिमिर-तोम को दूर भगाने को लौ हो लहराती। मिट जाए भू का अँधियारा जलता जाए दीप हमारा। हो आँधी, तूफान मगर […]
वह कैसी तलवार कि जिसमें धार नहीं है कौन कहेगा सिन्धु जहाँ मझधार नहीं है, सिर्फ ताप के लिए जले वह ज्वाला कैसी आँखों से न बरसे तो अंगार नहीं है । अनिल मिश्र प्रहरी।
वन्दे भारत। प्राणों में मृदुरस आज घोल। नित सजल,करुण तेरी चितवन तेरे पद – पंकज धोता घन परिमल भरता स्मित चंदन। देता अमृत पिक मृदुल बोल। […]
भारत – माता की जय बोल। हरित रंग में रंगी धरित्री रंगों की बिखरी बरसात, गेंदा, अड़हुल, मस्त- चमेली पवन संग झूमे पारिजात। वल्लरियाँ गातीं नित डोल […]
तू है माखनचोर। कान्हा तुम आ जाते छुपके खा जाते हो माखन चुपके, तड़के आँगन सखियाँ करतीं शोर तू है माखनचोर। दही मगन खा मटकी तोड़ी करते नहीं शरारत थोड़ी, गाँव में अब चर्चा है […]
रोग कोरोना से हुई मानवता बेचैन जीवन लगता रुष्ट है, बैरी दिखता चैन, बैरी दिखता चैन, मौत का नग्न – नृत्य है मौन-विधाता बता,किया क्यों क्रूर कृत्य है? रोग शमित होगा तभी, रहें भीड़ से […]
मन। क्यों घुट – घुट के जीता है रे मन? तुझे काया मिली इतनी माया मिली, तेरी राहों में बिखरा है मधुवन। क्यों घुट – घुट के जीता है रे मन। इतना सुन्दर- सा घर […]
वीरों का दिल से अभिनन्दन। सीमा पर डटकर खड़े हुए, दो-नयन शत्रु पर गड़े हुए, हाथों में अस्त्र सुशोभित है, उर से भय आज तिरोहित है। जन-गण-मन करते हैं वन्दन, वीरों का दिल से अभिनन्दन। […]
दर्द। टूटकर सपने नहीं कम हो सके पास रहकर भी न उनमें खो सके, अश्क से दामन मेरा है तरबतर फूटकर हम आजतक न रो सके। दूर भी हैं वो हमारे पास भी मौत भी […]
पूस की रात। थरथरा रहा बदन जमा हुआ लगे सदन, नींद भी उचट गयी रात बैठ कट गयी। ठंड का आघात पूस की रात। हवा भी सर्द है बही लगे कि बर्फ की मही, धुंध […]
सावन बीता जाये प्रियतम तुम न आये। मस्त पवन संग डोले किसलय ताल – तलैया, सागर में लय, बादल नभ पर छाये प्रियतम तुम न आये। कलियों पर है छायी लाली झूमे बेसुध कोमल डाली, […]
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