छूप छूप के खाये माखन
है ये माखन चोर
बड़ा नटखट है
प्यारा नंद किशोर
घुसे घर में मित्रो के संग
देखी माखन की मटकी
देखा खूब सारा माखन
सबकी नज़र उसी पे अटकी
खाये माखन मस्ती में मित्रो के साथ
देखा आ रही माँ यशोदा
भागे सब इधर उधर
बच गए सब
बस माखन चोर का पकड़ लिया हाथ
पकड़ के कान्हा के कान को दिया कस
बह रहा कटोरी से माखन का रस
बोले क्यों नहीं समझता तू
बहुत बदमाशी करली अब बस
छलका के आंसू
दिखाई भगवन ने लीला
देख आंसू माता ने
अपना हाथ कर दिया ढीला
मन मोहित रूप देख
माँ ने लगाया नंदलाल को गले
माता का सुख पाके
फिर कान्हा माखन चोरी करने चले
– हिमांशु ओझा
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