Author: himanshu ojha

  • आज़ादी

    स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:-

    दृढ़ निश्चय लेके निकले
    मुसीबत को निकाला जड़ से उखाड़
    ये देश भक्त हुए दुनिया में विख्यात
    जब लहू से लिखा इन वीरो ने भारत माँ का नाम

    करने आये थे व्यापार
    और कर रहे थे देश को बर्बाद
    देश के वीरो ने किया
    इन अंग्रेज़ो से हमे आज़ाद

    कठिन था हराना
    मजबूत थे जज्बात
    अंग्रेज़ो पे फ़तेह पाकर
    इस देश को किया आबाद

    मुसीबत की लेहरो को
    अपने जोश से मोड़ दिया
    जिस घमंड से आये थे अंग्रेज़
    उस घमंड को भी भारत के वीरो ने तोड़ दिया

    गाँधी ,नेहरु ,पटेल , सुभाष ने
    इस देश को आज़ादी दिलाई
    भगत , राजगुरु और , सुखदेव की
    क़ुरबानी से हर देशवासी की आँखे भर आई,

    दिखाई एकता की ताकत
    हुआ भारत विख्यात पूरे जहान में
    बुरी नज़र वालो दूर रहना
    ऐसे और वीर है इस हिंदुस्तान में

    फेहराओ तिरंगा
    याद रखो उन वीरो को
    भारत माँ की रक्षा
    की तोड़के अंग्रेज़ो की जंजीरो को

    देश का त्यौहार है आया
    खुशियाँ मनाओ और बांटो मिठाइयाँ
    आप सभी देशवासियो को
    स्वतंत्रता दिवस की खूब बधाइयाँ

    – अंशुल ओझा

  • माखन चोर 🙏

    छूप छूप के खाये माखन
    है ये माखन चोर
    बड़ा नटखट है
    प्यारा नंद किशोर

    घुसे घर में मित्रो के संग
    देखी माखन की मटकी
    देखा खूब सारा माखन
    सबकी नज़र उसी पे अटकी

    खाये माखन मस्ती में मित्रो के साथ
    देखा आ रही माँ यशोदा
    भागे सब इधर उधर
    बच गए सब
    बस माखन चोर का पकड़ लिया हाथ

    पकड़ के कान्हा के कान को दिया कस
    बह रहा कटोरी से माखन का रस
    बोले क्यों नहीं समझता तू
    बहुत बदमाशी करली अब बस

    छलका के आंसू
    दिखाई भगवन ने लीला
    देख आंसू माता ने
    अपना हाथ कर दिया ढीला

    मन मोहित रूप देख
    माँ ने लगाया नंदलाल को गले
    माता का सुख पाके
    फिर कान्हा माखन चोरी करने चले

    – हिमांशु ओझा

  • दोस्ती

    ना गम है
    ना दर्द है
    जो बिताया दोस्तों के साथ
    वो ही सुनहरा वक्त है

    ना है कोई खून का रिश्ता
    फिर भी निभाते ये दिलवाले है
    एक दूसरे में खुश रहते
    ये मस्त मतवाले है

    चाहे दिन हो या रात हो
    कोई दुःख लगा ना पाए हाथ
    अगर दोस्तों का साथ हो

    कई सफल कहानियो के पीछे
    दोस्तों का भी साथ होता है
    जरुरी नहीं की हर बार
    औरत का ही हाथ होता है

    दोस्तों के बगैर
    जीना भी क्या जीना
    वो दोस्त ही क्या
    जो ना हो कमीना

    ज़िन्दगी बीत जाती है
    बस रह जाते है कर्म
    ज़िन्दगी जीना सीखा दे
    वो ही है दोस्ती का धर्म

    – हिमांशु ओझा

    Happy friendship day dosto🥳🥳🥳👍🏻🥰

  • दिल बेचारा

    तुम्हारे जाने से
    रो पड़ा जगत सारा
    आओ देखे दिल बेचारा

    हर मूवी की तरह
    इस मूवी से भी
    जीत लिया तुमने दिल हमारा
    आओ देखे दिल बेचारा

    जिस बॉलीवुड ने
    तुम्हे दुत्कारा
    उसको कर देंगे बेसहारा
    आओ देखे दिल बेचारा

    तुम्हारी स्माइल पे
    जगत अपना दिल है हारा
    आओ देखे दिल बेचारा

    – हिमांशु ओझा

  • जमाना

    ना रुकेगा ये वक्त
    ना जमाना बदलेगा
    सुख जायगा जब पेड़
    तो ये परिंदा ठिकाना बदलेगा

    – हिमांशु ओझा

  • तबियत

    इज़्ज़त कमाने निकला था
    गुरुर कमा आया
    पैसे कमाने के चकर में
    तबियत बिगड़ आया

    – हिमांशु ओझा

  • लगाव

    दिल में लगा एक घाव हो गया
    हर प्रश्न का जवाब हो गया
    हमे पता ना चला
    शायद हमे भी उनसे लगाव हो गया !

    देर तक सोते थे
    अब खुली आँखों का ख्वाब हो गया
    उसके आने से ज़िन्दगी में
    सब कुछ लाजवाब हो गया

    मुझे समझने वाला वो
    खुली किताब हो गया
    ज़िन्दगी की दौड़ में जीता
    वो खुशियों का ख़िताब हो गया

    अभी मिले ही थे
    नजाने कहा गायब हो गया
    उसके ना मिलने पर
    आँखों से आंसू निकले
    तब हमे पता चला
    हमे भी उनसे लगाव हो गया

  • अब उठ नौजवान

    अब उठ नौजवान
    तुझे कुछ करना है
    जगमगाते दीप से
    सूरज की तरह चमकना है

    दिल जो कहे
    वो करना है
    ज़िंदा मछली की तरह
    धारा के विपरीत तैरना है

    ज़िन्दगी गिराएगी
    कभी भटकाएगी
    कहदे अपने होसलो से
    हर हाल में मंज़िल तक पहुंचना है

    अब उठ नौजवान
    तुझे कुछ करना है

    हार भी जाये तो गम मत करना
    अपनी राह पर चलते रहना
    क्यूंकि हार की रात कितनी घनी हो
    पर जीत का सवेरा तो होना है

    ना डर तू
    ना घबरा तू
    अपने होसलो के पंखो को फैलाके
    परिंदे की तरह आसमान में उड़ना है

    अब उठ नौजवान
    तुझे कुछ करना है

    अपने गमो को पीछे छोड़
    तुझे आगे बढ़ना है
    अब उठ नौजवान
    तुझे कुछ करना है

    ये जीत तो मिटटी है
    हाथ में आते ही फिसलेगी
    मेहनत के पसीने से
    इस मिटटी को कठोर बनाना है

    अब उठ नौजवान
    तुझे कुछ करना है

    इस ज़िन्दगी के सागर में
    कई तूफान आएंगे
    अपने हौसले की नाव को मजबूत बना
    इस सागर को पार करना है

    अब उठ नौजवान
    तुझे कुछ करना है

    पहले कदम में
    तेरा मन बहकेगा
    कुछ और करने को कहेगा
    पर याद रखना अपना वादा
    जो अपने आप से किया था
    चाहे गिर जाऊ राहो में कई बार
    पर मंज़िल की नज़रो से नहीं गिरना है
    अब उठ नौजवान
    तुझे कुछ करना है

    समझता हूँ तेरी
    राहे आसान नहीं
    रख भरोसा उस ऊपर वाले पर
    अगर उन्होंने रास्ता दिखाया है
    तो उनकी दया से ही तू मंज़िल तक पहुंचना है
    अब उठ नौजवान
    तुझे कुछ करना है

    कर तप पूरी लगन से
    तुझे ध्रुव तारा बनाना है
    अपने आने वाली पीढ़ी का
    मार्गदर्शक बनना है
    अब उठ नौजवान
    तुझे कुछ करना है

    – हिमांशु ओझा

  • पिताजी

    अपने सुख दुःख की पोटली को
    रख किनारे में
    हमारे सुख दुःख को
    अपना जीवन बनाया
    पिताजी ने ही हमे सब कुछ सिखाया

    कल तक चलना नहीं आता था
    चलना आपने सिखाया
    आज ज़िन्दगी की दौड़ में
    दौड़ रहा हूँ
    संभलना आपने सिखाया
    पिताजी ने हमे सब कुछ सिखाया

    कभी प्यार से
    कभी डांट के
    हमे सही गलत का मतलब बताया

    खाकर ठोकर
    रह ना जाये हमारा दिल कमजोर
    इस दिल मजबूत बनाया
    पिताजी ने हमे सब कुछ सिखाया

  • नमन 🙏

    जिनके नाम से दुश्मन
    थर थर कांपा करते है
    बलिदान हुए वीर जवानो को
    हम सब नमन करते है

    ये सच्चे देश भक्त है
    ऐसे नहीं जायेंगे
    दुश्मनो को
    अपनी रूह से भी हराएंगे

    देश को जगमगाये
    ये वो अमरदीप है
    देश के लिए मर मिटे
    ये वो शहीद है

    वो चले गए
    अब हमे उनकी राह पर चलना है
    उनकी तरह अपने देश के लिए कुछ करना है

    हमारी सुरक्षा के लिए
    सीमा पर तैनात ये रहते है
    सभी वीर जवानो को
    हम सब नमन करते है

    जय हिन्द 🙏

  • नमन 🙏

    जिनके नाम से दुश्मन
    थर थर कांपा करते है
    बलिदान हुए वीर जवानो को
    हम सब नमन करते है

    ये सच्चे देश भक्त है
    ऐसे नहीं जायेंगे
    दुश्मनो को
    अपनी रूह से भी हराएंगे

    देश को जगमगाये
    ये वो अमरदीप है
    देश के लिए मर मिटे
    ये वो शहीद है

    वो चले गए
    अब हमे उनकी राह पर चलना है
    उनकी तरह अपने देश के लिए कुछ करना है

    हमारी सुरक्षा के लिए
    सीमा पर तैनात ये रहते है
    सभी वीर जवानो को
    हम सब नमन करते है

    जय हिन्द 🙏

  • सच्ची ख़ुशी

    पथ पथ ख़ुशी की खोज में भटकता रहता हूँ
    उसके नूर के लिए तरसता रहता हूँ
    वो है हमसे खफा
    उस से मिलने के लिए
    भेस बदलता रहता हूँ

    पैसा पा लिया
    शोहरत पा ली
    फिर भी सोचता हूँ
    कहा मिली ख़ुशी
    उसको ही खोजता हूँ

    असली नकली ख़ुशी में क्या फर्क है
    बस वही समझता रहता हूँ

    दर दर भटक के थक गया
    अपनी ज़िन्दगी से पक गया
    आखिर में सोचा
    दिल की सुन लेता हूँ
    दिल बोला सुनो मेरी बात
    क्यों भटकता हो दरबदर
    ख़ुशी तो तुम्हारे साथ

    ये सुन झाँका अपने मन के भीतर
    सोचा कितना बड़ा हूँ बेवकूफ
    सच्ची में ख़ुशी तो है अपने अंदर

  • फंदे

    दो गज के फंदे से
    खुदको क्यों मार गए
    इस बेरहम दुनिया ने अब क्या किया
    जो खुद से ही हार गए

    चंद शब्द कहता हूँ
    RIP सुशांत सिंह राजपूत के लिए
    🙏🙏

  • दुःख

    वो इंसान अपने हर काम में फंसता है
    जो दुसरो के दुःख पे हँसता है !

  • तुझे कुछ कर दिखाना है

    भूतकाल के डर को
    वर्तमान में ख़तम कर
    भविष्य आगे भड़ाना है
    तुझे कुछ कर दिखाना है
    तुझे कुछ कर दिखाना है

    दुनिया के जाल से निकलकर
    तुझे अपना मान बढ़ाना है
    तुझे कुछ कर दिखाना है

    तेरा मन तुझे रोकेगा
    तेरे हर काम पे टोकेगा
    अपने इरादों के पंखो को फैलाये
    तुझे उड़के दिखाना है
    तुझे कुछ कर दिखाना है

    दिल से किया काम
    तेरे काम आएगा
    कर मेहनत
    तेरा भी वक्त आएगा

    हर हाल में मंज़िल को तुझे पाना है
    तुझे कुछ कर दिखाना है

    – हिमांशु ओझा

  • ऐ ज़िन्दगी

    ऐ ज़िन्दगी मैंने तुझको दिया क्या है
    तेरे लिए किया क्या है
    तूने मेरे गम पे खुशियों के वस्त्र ढक दिए
    तेरे लिए मैंने सिया किया है

    ना रखा तुझे खुश
    ना रखा ऐशो आराम में
    हर पल तुझसे माँगा
    तुझे दिया क्या है

    मैं पराया मांगू हर चीज़ स्वार्थ में
    तू अपना समझ कर दे निस्वार्थ में
    आखिर समझ नहीं आया
    ये रिश्ता क्या है

    तूने हर वक्त साथ दिया
    मेने हर कीमती वक्त है खोया
    तू तो हर वक्त मेरे लिए ही जिया है
    पर ऐ ज़िन्दगी मैंने तुझको दिया क्या है

  • नकाब

    कोई किसी के सुख में सुखी ना होये
    ना होये किसी के दुःख में दुखी
    बदल रहे नकाब बस कुछ मतलबी

  • मजदूर

    हमारा कसूर क्या था
    आखिर क्यों मजदुर हुए हम
    दर दर भटकने पर
    मजबूर हुए हम

    इस महामारी से तकरार है
    रोजी रोटी की दरकार है
    अपनों से मिलने के लिए
    बेक़रार हुए हम

    मरने का खौफ नहीं
    अपनों के साथ जीने मरने की खायी है कसम
    इस कसम को निभाने के लिए
    नाराज रास्तो पे चल पड़े हम

    जिन्दा रहे तो कीड़ों-मकोड़ों
    से रेंगते नजर आयेंगे ।
    मर गए तो ये सवाल,
    तुझसे पूछे जायेंगे ।

    मेरा कसूर बता,
    क्यों मजदूर हुए हम ।

  • सच झूठ

    एक दिन रस्ते पर मिले दो नौजवान
    मैंने पूछा दोनो से क्या है आपका शुभ नाम
    पहला बोला मेरा नाम है सच
    सब सोचते मैं हूँ ढीठा
    दूसरा बोलै मेरा नाम है झूठ
    दुसरो से बोलता हूँ मीठा

    झूठ बोले सच होता है मेरे नीचे
    ये बोले सामने
    मैं बोलू पीठ पीछे

    हम दोनों से चलती है दुनिया की हर रीत
    झूठ हो जाये कितना भी बड़ा
    पर सच जाता हमेशा जीत

    हर रस्ते पे हमसे मिलना होगा
    हम में से एक को तुम्हे चुनना होगा
    सच को चुनने से
    कुछ वक्त में मिल जायगा आराम
    झूठ चुनने से
    कुछ वक्त में ज़िन्दगी हो जायगी हराम

  • Shayri

    हर बीमारी का हल दवा नहीं होती
    हर छोटी चीज़ रवा नहीं होती
    भुज जाते है दीये कभी तेल की कमी से
    हर बार कुसूरवार हवा नहीं होती
    – हिमांशु ओझा

  • टुटा दिल

    आज मेरी हैसियत तुमने दिखा दी
    तुम्हारी नज़रो में मेरी कीमत तुमने दिखा दी
    कल तक तो पूछती थी खैरियत
    आज मेरी बुरी किस्मत तुमने दिखा दी

    मेरे साथ जीने मरने की कस्मे खाती थी
    मेरे साथ हर पल समय बिताती थी
    मैं कमजोर क्या हुआ
    मेरी औकात तुमने दिखा दी

    मैं भूल जाऊ ये मुमकिन है
    मेरा दिल तुम्हे भूल जाये ये नामुमकिन है
    मेरा दिल कितना कमजोर है
    आज ये हकीकत तुमने दिखा दी

  • जान

    मेरे दिल की आन हो तुम
    मेरे मन की शान हो तुम
    थोड़ी नादान हो
    पर मेरी जान हो तुम

    मुस्कुराओ तो फूल खिल जाये
    तुम्हारी ख़ुशी में मुझे सब मिल जाये
    इस अंजानी दुनिया में
    मेरी पहचान हो तुम

    तुम्हे बस देखता रहू वारि वारि
    तुझमे ही मेरी दुनिया सारी
    तुमसे ही महके ज़िन्दगी
    मेरी गुल-ए-गुलज़ार हो तुम
    – हिमांशु ओझा

  • रिश्ते

    सब रंगो का मेल होते है
    दुःख सुख में साथ होते है
    बुरे हो या अच्छे
    रिश्ते तो रिश्ते होते है

    रिश्तो के भी कई नाम होते है
    किसी की माता तो किसी के पिता
    किसी की जीवनसाथी तो किसी के दोस्त होते है
    रिश्ते तो रिश्ते होते है

    रिश्तो ने ही हमे जीना सिखाया
    उनके कारण ही हमने सब कुछ पाया
    उन्होंने ही हर रस्ते पे मदत की
    हमारे मंज़िल पहुंचने पर उन्होंने ही जशन बनाया

    रिश्ते निभाना ही हमारा पहला धर्म है
    यही पहला और यही आखरी कर्म है
    मत समझ धन दौलत को रिश्ते से बड़ा
    क्युकी ये बहुत बड़ा अधर्म है

    अँधेरे में ये दीये होते है
    दुसरो के खातिर जीये होते है
    डूबी ज़िन्दगी के ये नाव होते है
    दुसरो की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी देखने वाले
    आखिर रिश्ते तो रिश्ते ही होते है
    – हिमांशु ओझा

  • सपना

    तेरे नैनो में यु समाता हूँ
    बंद आंखे तो क्या
    खुली आँखों में भी दिख जाता हूँ
    तेरी अनहोनी को होनी कर
    मैं सपना कहलाता हूँ

    प्रगति का प्रथम चरन
    तेरा मैं ही बढ़ाता हूँ
    तेरे मन का आईना हूँ
    तेरी हकीकत दिखाता हूँ

    कभी पूरी नींद दिलाता हूँ
    तो कभी बीच नींद में ही जगाता हूँ
    तुम्हारा नजरिया हूँ
    अच्छा तो कभी बुरा कहलाता हूँ

    आमिर गरीब में समानता दिखाता हूँ
    गरीब को भी विदेश घुमा लाता हूँ
    मेरे को देखने में क्या जाता है

    मजा तो तब आये
    मेहनत कर मुझे पूरा कर जाओगे
    सिर्फ मुझको देखके
    ना कुछ पाए थे ना कुछ पाओगे

    – हिमांशु ओझा

  • इंसानियत भूल जाते है

    इंसान ही इंसानियत भूल जाते है
    जिसको मानते है भगवान
    उसको ही मार आते है

    ये सिर्फ भगवन को जानते है
    पर उनकी कहा मानते है
    चंद पैसो के लिए
    ये खुद बीक जाते है

    इस महामारी से भी कुछ ना सीखा
    उस मासूम के जान के बदले तुझे पैसा ही दिखा

    अरे मुर्ख
    उसके साथ एक नन्ही है जान ये तो सोचा होता
    चंद पैसो के बदले उस मासूम को देखा होता
    ऐसे कर्मो से ही धरती पे विनाश है आते
    इंसान ही इंसानियत है भूल जाते

  • पता ना चलिया है

    वक्त वक्त देख वक्त का
    पता ना चलिया है
    जब चले पता
    तब तक वक्त निकलया है

    सोच सोच के राह का
    पता न चलिया है
    जब चले पता
    तब तक मंज़िल छुटिया है

    क्रोध क्रोध में क्रोध का
    पता ना चलिया है
    जब चले पता
    तब तक रिश्ता चला गया है

    लोभ लोभ में लोभ का
    पता ना चलिया है
    जब चले पता
    तब तक सब ख़तम हो गया है

    मै मै में मै का
    पता ना चलिए है
    जब चले पता
    तब तक पुण्य ख़तम हो गया है
    – हिमांशु ओझा

  • वक्त

    मत कहो की वक्त नहीं
    कही वक्त न कह दे हम तो है पर तुम नहीं
    – हिमांशु ओझा

  • प्यार एक तरफ़ा

    खुदा ने सुनी मेरी
    जो आपको यहाँ पंहुचा गए
    हमे तो खबर ना हुई
    आप कब हमारे दिल में आ गए

    गहरे समुन्दर में
    प्यार की नईया पार हो जाये
    हमारी तो हां है
    बस उनकी भी हां हो जाये

    ज़िन्दगी में एक पल सुनहेरा आता है
    प्यार की घडी में
    इंतज़ार कहलाता है

    तुम्हारे बोल में भी एक नगमा हो गया
    तुम्हे हो ना हो
    हमे प्यार एक तरफ़ा हो गया

    ये दिल सनम तेरा हो गया
    तेरे लिए मेरा प्यार ग़हरा हो गया

    हमने अपने दिल को तेरी और कर लिया
    भले ही ना जाने तू हमे
    तेरी पसंद ना पसंद पे हमने गौर कर लिया

    तुझसे इज़हार करने से शर्माता हूँ
    तुझको खो ना दू
    ये सोचके घबराता हूँ

    हमारा मिलना जरुरी नहीं
    पर ज़िद है मेरी
    ज़िद भी ख़तम कर दू
    अगर इसमें ख़ुशी है तेरी

    तुझको देख प्यार पहली दफा हो गया
    तुम्हे हो ना हो
    हमे प्यार एक तरफ़ा हो गया

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • अवसर

    ये धरती पे अंधकार है छाया
    देख सूरज नया सवेरा है लाया
    तेरी ज़िन्दगी में नया अवसर है आया
    जो करे कोशिश
    अवसर उसने ही पाया

    कर कोशिश उस अवसर को पाने की
    कर कोशिश हर डर को हराने की
    तू भी जा सकता है चाँद पर
    बस देरी है हौसला जगाने की

    रह मत चुप एक बिल में
    खुलके कर जो हो तेरे दिल में
    पता नहीं कब मिले मौका
    कर कुछ अच्छा हर दिन में

    कुछ मिले ना मिले
    तेरी कोशिश करता चल
    भले ना मिले मंज़िल
    तेरे रस्ते सुहाने करता चल

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • जन्मदिन

    आज मेरा जन्मदिन है
    आप लोगो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया उसके लिए धन्यवाद्

  • छोटी बहन

    सुने घर में फिर बाजी किलकारी
    आंगन में पायल छनकारी
    टुकुर टुकुर देख
    आ रही छोटी बहन प्यारी

    सामने उसको पाए
    सारे दुःख दूर हो जाये
    जब भी वो मुस्कुराये
    खुशियों की लहर है आये

    फिर आयी खुशिया जो थी थमी
    आगई घर की लक्ष्मी
    बढ़ाई घर की रौनक
    जिसकी थी कमी

    तेरी मुस्कान पे दुनिया तेरे नाम हो जाये
    तू रोये तो पूरा घर है हिल जाये
    तुझको देख मिल जाती है खुशिया सारी
    मेरी बहन है प्यारी

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • श्याम

    अनजान सी रुक्मणि बेचैन सी मीरा
    राधा ही जाने श्याम की पीड़ा

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • गुरु

    ना था रस्ते का पता
    ना थी मंज़िल की चाहत
    थके ज़िन्दगी से
    गुरु के चरणों में मिली राहत

    माता पिता ने चलना सिखाया
    मिला ना मंज़िल का कोई अता
    गुरु के चरणों में शीश झुकाकर
    मिला सही गलत का पता

    गुरु का रखो मान
    उनका ना करो अपमान
    गुरु के ज्ञान को धारण कर
    अर्जुन बन गया धनुर्धारी महान

    गुरु के ज्ञान को स्वीकार करो
    इस ज्ञान से अपना उद्धार करो
    हर क्षण इनका गुण गाकर
    इनके चरणों को प्रणाम करो

    गुरु के ज्ञान से सब ठीक हो जायगा
    इस ज्ञान रूपी दीपक से
    अज्ञान का अंधकार हार जायगा
    ज़िन्दगी की दौड़ में
    ये ज्ञान काम आ जायगा

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • दोस्ती

    कभी बुलाये प्यार से
    कभी बुलाये मजाक से
    ज़िन्दगी की हर घडी ये साथ देती है
    दोस्ती होती ही ऐसी है

    दिल होवे गम में
    तो ये बात करे नरम में
    छोटी ख़ुशी में भी
    पार्टी मांगे जमके
    मूड चाहे जैसा हो ये मज़ाक करती है
    दोस्ती होती ही ऐसी है

    किसी से हुई मारपीट हो
    किसी ने कर दिया चीट हो
    ये उसको भी पछाड़ देती है
    दोस्ती होती ही ऐसी है

    ये ना बुलाये कभी नाम से
    दूसरा उड़ाए मजाक तो
    गया वो काम से
    हर बात में ये पास होती है
    दोस्ती होती ही ऐसी है

    दोस्ती की रीत तो पुरखो से चली आयी है
    विभीषण जैसा मित्र पाकर श्री राम ने रावण पर विजय पायी है
    दोस्त हर वादा निभाता पूरा है
    दोस्त ही नहीं तो जीवन अधूरा है
    परिवार भेजे सही राह पे तो मंज़िल ये पहुँचती है
    दोस्ती होती ही ऐसी है

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • श्री राम

    कथा सुनाऊ पुरुषोत्तम श्री राम की
    विष्णु रूपी अयोध्या पति नाथ की
    त्रेता युग में जनम हुआ
    राजा दशरथ के महल में
    अयोध्या हुआ पूरा चहल पहल में

    सुमित्रा से जनम हुआ लक्ष्मण और शत्रुघ्न का
    जनम हुआ कैकेयी पुत्र भरत का
    खुशियों की लहर उठी
    आये भाई श्री राम के

    ग्रंथो का ज्ञान मिला गुरु वशिस्ठ की कृपा से
    शास्त्रों का ज्ञान मिला गुरु विश्वामित्र की दया से

    आयी घडी खुशियों की
    सबका जीवन सफल है हो गया
    राम का सीता से मिलन हो गया
    विधाता ने इस सुन्दर जोड़ी को है जोड़ दिया
    सीता के लिए श्री राम ने शिव धानुष है तोड़ दिया

    मंथरा ने शब्द भरे केकयी के कान में
    भरत बने युवराज और राम जाये वन में
    भरत ने ठुकराई बात
    रखी पादुका श्री राम की सिंघासन पे
    चौदह साल के लिए चल दिये श्री राम लक्ष्मण और सीता वन में

    मर्यादा मन में है पाले
    वस्त्र धारी वल्कल वाले
    जनकनन्दिनी का संगी।
    सेवक जिसका बजरंगी।

    था व्यभिचारी, वामाचारी।
    वो रावण बड़ा अहंकारी
    लाकर उसको पंचवटी।
    मन में हर्षाया कपटी

    मिथ्यावादी फैलाकर जाल
    बुला बैठा लंका में काल
    कमल नयन फूटी ज्वाला
    महापाप रावण ने कर डाला

    दानव बोला अंत में
    जो विजय पताका नाम है
    वो राम है , वो राम है

    इंसा में बसा भगवान है
    शत्रु को क्षमादान है
    सर्वाधिक दयावान है
    मर्यादा की पहचान है
    नर नारी का सम्मान है
    हिंदुत्व का अभिमान है

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • कोरोना

    चंद लम्हो की ज़िन्दगी में अब और क्या- क्या होना है
    ब्रष्टाचार क्या कम था जो आगया कोरोना है
    गरीब खा रहे मांगके और अमीरो के पास सोना है
    मिडिल क्लास की किस्मत में तो रोना ही रोना है
    इस परेशानी में पूरा जाहां है रो दिया
    कितनो ने अपने परिवार को है खो दिया
    सारे देशो में ये लॉकडाउन है शुरू हो गए
    जो जहा थे वो वही है रुक गए
    घर जाते वक़्त कुछ रस्ते में ही मर गए
    और घरवाले है की घर में बैठे बैठे थक गए
    फिर भी इरादों में कमी नहीं लाएंगे
    नियम पालन कर इसको हम हराएंगे
    विदेशी को छोड़ अपनी संस्कृति अपनाएंगे
    जोड़ लेंगे हाथ पर हाथ नहीं मिलाएंगे
    वक़्त- वक़्त पर हाथ हम धोते जायेंगे
    बहार जाते वक़्त मास्क पहन जायेंगे
    किसी अज्ञात चीज़ को हाथ नहीं लगाएंगे
    सुनो डॉक्टर, पुलिस तुमसे कुछ कह रहे
    बहार रहकर सबकी रक्षा है ये कर रहे
    अपनी जानपर खेलकर इस बीमारी से लड़ रहे
    निकलो मत घर से सबको है ये कह रहे
    बरतो सावधानी डरो मत सबको ये बता रहे
    पूरी कोशिश करके बीमारी को जड़ से है ये मिटा रहे
    यह सुनके पूरा देश बोले आज
    में भी इनका साथ दूंगा
    ये जो बोले उस नियम का पालन करूँगा
    रहकर घर पे अपनी और अपने देश वासियो की रक्षा करूँगा
    हम देश वासियो को अब साथ मिलकर चलना है
    चंद लम्हो की ज़िन्दगी में अब और क्या- क्या होना है

  • भुआ

    बैठे थे गुमसुम से एक टक निहार के
    दादी आयी बोली फिर
    भुआ आ रही है ससुराल से
    ये सुनके खुश हुए की भुआ हमारी आएगी
    उनके आने से इस घर की रौनक बढ़ जाएगी
    अपने साथ वो मेरे भाइयो को भी लाएगी
    हम सबको वो खेल खिलाएगी
    मेरे लिए वो स्पेशल ड्रेस भी लाएगी
    भुआ भतीजे का तो रिश्ता ही न्यारा है
    एक रिश्ते में ये कई रिश्ते निभाती है
    प्रेम बरसाने में तो वो माँ बन जाती है
    बड़ी बहन की तरह हर मुश्किल में मदत कर जाती है
    तारीफ में उनकी तो शब्द कम पड़ जायेंगे
    नदी क्या सातो सागर भर जायेंगे
    भुआ हमारी निभाती हर रीत है
    भुआ हमारी प्रेम का प्रतिक है

  • दादी माँ

    आंगन में बैठी एक टक निहार लेती है
    चलती धीरे पर काम तेजी से कर लेती है
    पढ़ना कम आता है पर दुनिया का पाठ पढ़ा देती है
    डॉक्टर नहीं पर हर दर्द ठीक कर देती है
    दादी माँ की बात ही निराली है
    तुम्हे मिले सबसे ज्यादा इसलिए बादमे वो खाती है
    तुम सो चैन से इसलिए बादमे वो सोती है
    दिखा ख़ुशी का चेहरा अपने दुःख में अंदर ही अंदर रोती है
    साक्षात् भगवन भी इनसे मार्ग दर्शन लेता है
    सफल वो ही ज़िन्दगी में जो इनसे आशीर्वाद लेता है
    चारो धाम का पुण्य मिले जो इनकी सेवा करता है
    जो इनके साथ रहे वो किसी मुश्किल से नहीं डरता है
    माँ का दर्जा ऊंचा है
    पर इनका उनसे भी ऊँचा है
    इनके बताने पर ही सही दिशा पर चलती दुनिया सारी है
    दादी माँ की बात ही निराली है

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • उठ भी जा ना

    चल अब उठ भी जा ना
    अभी कुछ काम नहीं फिर भी क्यों तू थकता है
    मुश्किलों को देख के इतना क्यों डरता है
    सिख कुछ सूरज , चाँद से
    खुद वक़्त पे है आते
    पुरे जहान में वक़्त पे रौशनी है फैलाते
    अगर ये नहीं उठते वक़्त पे
    तो कहा तू उठा करता
    ना कही देख पाता सिर्फ सो जाया करता
    चल अब उठ भी जा ना
    सिख किसान , डॉक्टर , सैनिक से कुछ
    कितनी मेहनत करता है
    सब काम के बाद भी समय पे ये उठता है
    मेहनत करने वाला ही चैन की नींद सोता है
    अगर ये नहीं उठते वक़्त पे
    तो ना कभी चैन से खाता और ना सो पाया करता
    चल अब उठ भी जा ना
    बुजर्गो से सीख कुछ
    कितनी जल्दी उठ रहे
    रिटायर्ड हो गए पर अपना काम कर रहे
    जल्दी उठ कर ये पूजा पाठ कर रहे
    अगर ये नहीं उठते वक़्त पे
    तो तुझे कौन उठाया करता
    खुद मेहनत कर तेरी चीज़े कौन लाया करता
    तू जीवन के हर कदम पे सफल हो ये दुआ कौन किया करता
    चल अब तो उठ जा ना

  • दिल तुम्हारी और

    आज भी वो दिल तुम्हारी और जाता है
    जो तुमने तोड़ दिया था
    आज भी तुम्हारे गुण गाता है
    जिसका मुँह चुप कर दिया था
    आज भी तुम्हारी गलियों में रहता है
    जिसको कही और छोड़ दिया था
    ये दिल सब जनता है
    पर कहा मानता है
    ये आज भी तुम्हारी आवाज सुनना चाहता है
    जिस से तुम बोलती नहीं
    खूब समझाया पर माना नहीं
    वो किसी की दिल लगी को सजा समझने लगे ,
    दो पल रूत के गुज़ारे , तो जफ़ा समझने लगे
    अपने दिल से बोला आ तुझे जोड़ देता हु
    ज़िन्दगी के पहिये को ख़ुशी की और मोड़ देता हु
    इस नर्क से तेरा नाता तोड़ देता हु
    पर दिल को कहा समझ में आता है
    आज भी वो दिल तुम्हारी और जाता है

    हिमांशु की कलम जुबानी

  • दिल

    दिल में जगह की कमी नहीं होती
    यह तो खुला आसमान है
    खूब पंख फैलाओ यहाँ बाटने वाली जमीन नहीं होती

  • हम सब

    आओ इस कल्पना की दुनिया में खो जाये
    हम सब एक हो जाये
    ये जात पात सब मिट जाये
    आओ सब अपने दुःख सुख में एक हो जाये
    आओ इस कल्पना की दुनिया में खो जाये
    हमारे सपनो में भी पंख लग जाये
    खुद खुश रहे और दुनिया में ख़ुशी फैलाये
    हम ज़िन्दगी में खूब उचे उड़े
    पर धरती को ना भूल जाये
    इस दुनिया के समुन्दर में तेर हम सफलता के मोती ले आये
    कभी डॉक्टर बन जाये तो कभी सैनिक बन जाये
    अपने देश के लिए कुछ कर जाये
    हम सब एक हो जाये
    आओ इस कल्पना की दुनिया में खो जाये

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • mere dil

    मेरे दिल से आज एक आवाज आयी
    बोलै बहार मत जाना मेरे भाई
    वरना पुलिस करेगी पिटाई
    पुलिस और डॉक्टर कर रहे है कोरोना से लड़ाई
    कोरोना के चाकर में कुछ की रुक गयी है शादी और सगाई
    सबकी रुक गयी है कमाई
    सबको मिलकर हटानी है इस देश से कोरोना की परछाई
    सरकार की मनो बात जो उन्होंने है बताई
    आओ घर में रहकर जीते इस कोरोना की लड़ाई
    मेरे दिल से आज एक आवाज आयी

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • मेरे पास

    धीरे से मेरे पास आ जाता है कोई
    मेरे दिल को लुभा जाता है कोई
    मेरे कान में मीठे स्वर बोल
    परछाई बन जाता है कोई
    मेरा मन ज़रा बेचैन है
    उसको ज़रा सा भी नहीं चैन है
    दर्शन दे मन शांत कर जाता है कोई
    धीरे से मेरे पास आ जाता है कोई

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • माँ

    Happy mothers day
    हर सफलता के पीछे माँ का सहारा है दोस्तों
    डूबती नैया पार लगदे वो किनारा है दोस्तों
    माँ के आशीर्वाद से जीवन सफल हो जायगा
    माँ के प्यार से सब ठीक हो जायगा
    सेवा करो माँ की जीवन का हर शून्य ख़तम हो जायगा
    अपमान मत करो माँ का वर्ण हर पुण्य ख़तम हो जायगा
    माँ शब्द बोलने से चारो धाम हो जायगा
    हर व्यक्ति बस यही गुण गाएगा दोस्तों
    हर सफलता के पीछे माँ का सहारा है दोस्तों

    written by – himanshu ojha

  • kuch baat to hai tum me

    Kuch baat to hai tum me jo mujhe tumhari or le jaati hai

    Tumhari rooh ko meri rooh se har waqt milati hai

    Yaad me tumhari kabhi hasati hai to kabhi rulati hai

    Badi kambhaqt hai tumhari yaad sapne me bhi aa jaati hai

    Jaha jau waha tumhari parchai dikh jati hai

    Tumhare naino ki sundarta is dil me samati hai

    Tumhari katilana muskan pe jaan si atak jaati hai

    Kuch to baat hai tum me jo mujhe tumhari or le jaati hai

  • Haal Bataeye

    Samundar kehta hai nadi se zara mujhme mil jayeye
    Aaram se bathiye zara apna haal to bataeye
    Wo bole haal to bata denge zara ek cup chai to layeye
    Sirf chai se baat nhi banegi zara nashta bhi to khaeye
    Mata ji ki tabiyat kaisi haii ye bataeye
    Apne sath unko bhi humare leke ayeye
    wo sab to thik hai apna haal to bataeye

  • suneye meri kavita

    Shayri – Kiske khwaabo me raat bhar jag rahe ho
    Kya baat hai aaj bade khush lag rahe ho
    POEM
    Suneye zara meri kavita shuru me karta hu
    Garmi ka waqt hai thodi thandi baat me karta hu
    In dino sabki sundar kavitaye me padhta hu
    Kavita likhna ap sabse hi to me sikhta hu
    Fir jake apni kavita apke samne rakhta hu
    Desh ka naujavan hu
    Tirangee se pyar karta hu
    Ap sabhi ki tarah me bhi uspe marta hu
    Bharat mata ki jai har bar me yeh kehta hu
    Kisike liye bura na bolu har bar me yeh sochta hu
    Kaisi lagi meri kavita jo me likhta hu
    Kya kavita ke dhaage me shabd sahi pirota hu
    Suneye zara meri kavita shuru me karta hu

    THANK YOU

  • Desh Sankat

    Desh Sankat

    Ye desh me kaisa sankat hai aa gaya
    Kuch ko kar raha bimar or kuch ko maut ki nind sula gaya
    Ye sadko pe kaisa sanata hai chaa gaya
    Ye desh me kaisa sankat hai aa gaya
    Ab aya hai to use hume harana hai
    Markar nhi hath jodkar usse bhagana hai
    Bahar bulaye kitna par ghar par rehke use harana hai
    Khud to khush rehna or dusro ko khush karna hai
    Bure waqt me ekta banaye rakhna hai
    Desh ke veero me doctor upar aa gaya
    Khud ki janpar khel kar dusro ko bacha gaya
    Senik sarhad pe desh ki raksha hai karte
    Andar se police ne hai is bimari se bacha diya
    Sabji wala ho ya rashan wala ya ho newspaper wala
    In sab ne us waqt madat ki jab pura desh ghabra gaya
    Ye desh me kaisa sankat hai aa gaya

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