9 Comments

  1. बहुत खूब
    प्रेम, वात्सल्य, ममत्व, आत्मीयता की परिभाषा है
    कोई और नहीं, हर जन की प्रिय अपनी हिन्दी भाषा है
    सुन्दर कविता, बेहतरीन पंक्तियाँ

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