10 Comments

  1. जो बोओगे वही काटना है।
    बोले, बस अब और नहीं,
    अब मात-पिता को घर लाना है।
    मात-पिता की सेवा करके,
    बस अब पुण्य कमाना है॥
    — कवि गीता जी, आपने बहुत सुंदर संदेश दिया है। कविता की पहली आवश्यकता है कि वह समाज को सही दिशा दे सके, जब दिशा दी जायेगी तो उसका कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य पड़ेगा। सामाजिक जीवन से मिली को पंक्तिबद्ध कर समाज को प्रेरित करने में आपने पूरी सफलता पाई है।

    1. कविता की इतनी सुन्दर और उत्साह वर्धक समीक्षा के लिए आपका तहेदिल से धन्यवाद सतीश जी, अभिवादन

  2. प्यार जिन से मिला उन्ही पेड़ों को कैसे सताते हैं 
    क्या सिखाते हैं और क्या संतान सीख जाते हैं 

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