माथे की लकीरें

माथे की लकीरें हर दिन बढ़ती जाती है
भविष्य की चिंता रोज उभरती जाती है

Comments

4 responses to “माथे की लकीरें”

  1. Sridhar Avatar

    उभरती है हर रोज मुश्किलें नदीं में उफ़ान सी
    डूब जाती है हर रोज जिंदगी बेजान सी

  2. Mithilesh Rai Avatar

    बहुत खूब लाजवाब

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