माथे की लकीरें हर दिन बढ़ती जाती है
भविष्य की चिंता रोज उभरती जाती है
माथे की लकीरें

Comments
4 responses to “माथे की लकीरें”
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उभरती है हर रोज मुश्किलें नदीं में उफ़ान सी
डूब जाती है हर रोज जिंदगी बेजान सी-

वाह
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nice
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बहुत खूब लाजवाब
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