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  1. बहुत सुंदर कविता है सतीश जी, मिट्टी ही तो है जिसमें बीज डलकर उगता है और हमें फल फूल मिलते हैं ।फिर मिट्टी के पुतलों को मिट्टीसे क्या डर ,वाह सर दार्शनिक विचारों वाली बहुत सुंदर रचना..

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