मिठास कहां

अब मिठास बची कहां
ना रिश्तो में
ना नातों में
ना अपनों की
बातों में
कड़वाहट के बीज
बोयें जा रहे
ना जाने कहां-कहां ?
अब मिठास बची कहां ?
बातें भी शुरू होती
सिर्फ तानों से
तानें तो ऐसे
नासूर होते
बस प्यार बचा है
अपने ही प्राणों से
होता मतलब जब
बस दो बूंद टपकती
मिठास वहां
–✍️–एकता

Comments

6 responses to “मिठास कहां”

  1. राकेश पाठक

    सुंदर यथार्थ

    1. Ekta

      धन्यवाद

    1. सादर आभार

  2. अब बच्ची मिठास कहां वाह बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

    1. सादर आभार 

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