सावन की बूंदें मन में हलचल कर रहीं
तुम कहाँ हो मीत मेरे आओ ना,
मत रहो यूँ दूर मुझसे आओ ना,
मैं मनोहर ऋतु में आखें भर रही,
बाढ़ मत आने दो मेरे नैन में
मत बहाओ आस मेरी, आओ ना,
इस भरी बरसात में बेचैन हूँ
तुम कहाँ हो मीत मेरे आओ ना,
मीत मेरे
Comments
11 responses to “मीत मेरे”
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👏👏
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thanks sir
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वेलकम
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उत्तम
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dhanyvaad
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Badiya
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thanks
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बहुत सुंदर
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dhanyvaad ji
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Uttam
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Dhanyvaad ji
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