मुकाम ए जिंदगी

क्या मंजिले इतनी जरूरी हैं कि
रास्तों की कद्र न हो?
मुकाम ए जिंदगी पर तो हे दोस्त
राहे ही पहुंचाती हैं!

Comments

8 responses to “मुकाम ए जिंदगी”

  1. बहुत सुंदर पंक्तियां

  2. मुकाम ए जिंदगी पर तो हे दोस्त
    राहे ही पहुंचाती हैं!
    बहुत सुंदर लिखती हैं आप, very nice

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