मुक्तक 15

कहीं है दफ़्न  तुम्हारा ग़म हमारे दिल के कोने में,

हमे भी मीर लाशो को बहुत रखना नहीं आता..

…atr

Comments

2 responses to “मुक्तक 15”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Satish Pandey

    Very nice

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