मुक्तक

आज भी मुझमे कही तुम रहते हो

मै तो अनपढ़ हूँ, तुम लिखते रहते हो

धड़कनो के सुर पे जब साज़ लगते है

मै तो खामोश होता हू तुम गाते रहते हो

#VIP~

Comments

8 responses to “मुक्तक”

  1. Vipul Avatar

    सादार आभार

    1. Vipul Avatar

      सादर आभार

    1. Vipul Avatar

      सादर आभार

  2. Abhishek kumar

    Good

Leave a Reply

New Report

Close