मुझे मौत दे दे

तुम मुझे कभी नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते
मेरे दिल को एक बार नहीं
बार-बार हो तोड़ते
हम सब कुछ भुला कर एक नई जिंदगी की शुरुआत कर देते हैं अपनी जिंदगी की दो चार गजल लिख देते हैं
जाने क्यों तुम्हें ईर्ष्या होती है
इतनी ही ईर्ष्या है तो
भगवान से दुआ करो
कि मुझे मौत दे दे
फिर मेरा लिखना खत्म
सारे फसाद खत्म।।

Comments

3 responses to “मुझे मौत दे दे”

    1. धन्यवाद आपका बहुत बहुत आभार व्यक्त करते हैं 

  1. Amita

    आपकी इन पंक्तियों में निराशा के भाव झलक रहे हैं,सदैव कुछ अच्छा होने की कामना करें।

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