8 Comments

  1. कवि प्रज्ञा जी की कविता में बहुत ही गहराई और सच्चाई छिपी हुई है
    मुसीबत में कोई साथ छोड़ दे तो कैसा अपनापन ।
    वाह ,बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ।

Leave a Reply