मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में

मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में
विघ्न डालो नहीं आज आनन्द में,
मन है कोमल, जरा भोलेपन में भी है
आज डालो नहीं आप फिर द्वंद में।

Comments

3 responses to “मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

  2. लाजवाब अभिव्यक्ति

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