मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में
विघ्न डालो नहीं आज आनन्द में,
मन है कोमल, जरा भोलेपन में भी है
आज डालो नहीं आप फिर द्वंद में।
मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में
Comments
3 responses to “मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में”
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अतिसुंदर भाव
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लाजवाब अभिव्यक्ति
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बहुत खूब
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