सुनो ए दोस्त तुम ए काम न किया करो।
मुहब्बत को यों बदनाम न किया करो।।
माना कि रास्ते बहुत कठिन है इश्क के।
फिर भी अपनी इश्क़ पे यकीन किया करो।।
जो हर मर्तबा खोता है वही शख्स पाता है।
बस थोड़ा सा इन्तजार की घड़ियाँ गिना करो।।
ए क्या पल में पागलपन पल में ही मयख़ाना।
खुदा के लिए तुम ऐसा पागलपन न किया करो।।
मुहब्बत को बदनाम न करो
Comments
5 responses to “मुहब्बत को बदनाम न करो”
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अतिसुंदर भाव
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सुंदर अभिव्यक्ति
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सही कहा
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बहुत सुन्दर
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बहुत खूब
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