मुहब्बत नाम है मेरा

मैं मुस्कुराती हूँ,
गुनगुनाती हूँ,
कभी उत्साह में उड़ती
कभी गम के कुंए में डूबती,
फिर
गोता लगाकर लौट आती,
उतरती डूबती सी
डूबती फिर से उतरती डूबती सी,
एक दिन दो दिन, महीने, वर्ष बीते,
फिर भी
आपको भूले भुलाए याद करती सी चली,
उस ओर अपने पग बढाती सी चली,
जिस ओर केवल आश है,
झूठी दिलासा साथ है,
जिस बिंदु को सच्चे समय ठुकरा दिया,
वो बिंदु फिर मिलता नहीं
यह आज के वेदों का सच है,
झूठी दिलासा साथ है ,
मुहब्बत नाम है मेरा,
दिलासा काम है मेरा।
……………………………………..डॉ. सतीश पांडेय, चम्पावत।

Comments

6 responses to “मुहब्बत नाम है मेरा”

    1. Satish Chandra Pandey

      सादर धन्यवाद

  1. बहुत सुन्दर कविता, अति सुन्दर प्रस्तुति

    1. Satish Chandra Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी

  2. बहुत ही सुन्दर भाव है। 

    1. Satish Chandra Pandey

      बहुत बहुत बधाई

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