वफ़ा कीजिए खुद वफ़ा ही मिलेगी,
धोखे से बस बेवफाई मिलेगी।
मुहोब्बत अगर साफ पानी से होगी,
दिल ए गंदगी को , जगह ना मिलेगी।
सड़क धूल से, इस कदर जब भरी हो,
पांवों को निर्मल, वफ़ा ना मिलेगी।
सदा कोसते हम रहे दुश्मनों को
मगर इससे कोई दिशा ना मिलेगी।
— डॉ0 सतीश पाण्डेय
मुहोब्बत अगर साफ पानी से होगी
Comments
4 responses to “मुहोब्बत अगर साफ पानी से होगी”
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वाह वाह, बहुत खूब
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बहुत खूब कवित्त्व
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बहुत सुंदर रचना,अति सुंदर भाव एवम् प्रस्तुति
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बहुत खूब
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