मृगमरीचिका

चीखते चेहरों पर चीखने से क्या फायदा
सजा मिल जाने पर,
बेगुनाह साबित होने से भी क्या फायदा ।
इज्जत की नाम अपने ही मासूमो की हत्या
साथ देने के बदले आरोप लगाते हैं मिथ्या
मानवता के मूल्यों को खोने से क्या फायदा ।
जो दिखता है वैसा, अकसर होता नहीं
दूजो के लिए अपनों को ऐसे खोता नहीं
मृगतृष्णा के पीछे भागने से क्या फायदा ।

Comments

4 responses to “मृगमरीचिका”

  1. बात बिल्कुल सही है

  2. Satish Pandey

    यथार्थ पर आधारित सच्चे भाव हैं। “चीखते चेहरों पर चीखने से क्या फायदा” में आनुप्रासिक अलंकरण है। वाह

  3. Pratima chaudhary

    सुन्दर प्रस्तुति

Leave a Reply

New Report

Close