मेरा जीवनसाथी

जान जोखिम में डालकर
मेरी जान बचाई उसने
अधजले बदन को भी
प्यार से सराहा उसने
मेरे आत्मविश्वास को
अपने सहयोग से बढ़ाया उसने
विवाह करके मुझसे
अपना वादा निभाया उसने
दिया जीवन भर अपना प्यार
मुझ अभागिन को
अपनी अर्धांगिनी बनाया उसने
मेरे जीवनसाथी में सब कुछ पाया मैंने…

Comments

5 responses to “मेरा जीवनसाथी”

  1. सही कहा आपने कुरूप हो जाने पर भी जो हमेशा आपका साथ दे वो ही जीवनसाथी है

  2. सुन्दर रचना

  3. Satish Pandey

    कवि प्रज्ञा जी की यह कम शब्दों में बहुत सुंदर रचना है। काबिलेतारीफ है।

  4. Geeta kumari

    अति सुन्दर भाव और अति सुंदर रचना की प्रस्तुति

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