मेरा प्यारा टिंकू

मेरा कानपुर वाला दोस्त
आज बहुत याद आ रहा है
एक अर्से के बाद
दिल में उसका खयाल
आ रहा है
हनी सिंह के गाने
मेेरे कहने पर गुनगुनाता था
नाराज होती थी जो तो
प्यार से मनाता था
कभी उदास होती थी गर
तो चुटकुले सुनाकर
खुद ही हँसता जाता था
करता था प्यार मुझसे
पर छुपाता था
मेरे उनका फोन आने पर
जल-भुन जाता था
रोता था मेरे लिए पर
सामने हँसता था
मुझसे मिलने सीतापुर भी
आ जाता था
गली में खड़ा होकर देखता था मुझे
मुहल्ले वालों के निकलने पर
भाग जाता था
पता नहीं कहाँ है अब वो
सुना है इन्जीनियर बन गया है वो
मेरा प्यारा टिंकू
बहुत बड़ा हो गया है….

Comments

10 responses to “मेरा प्यारा टिंकू”

  1. Rishi Kumar

    🙏😀👌✍✍🤔🤔

  2. Geeta kumari

    वाह , एक दोस्त की याद में बहुत सुंदर और सहज रचना

  3. मित्र पर बहुत सुंदर कविता, सुन्दर अभिव्यक्ति

  4. सुन्दर अभिव्यक्ति

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