*मेरा प्रण तो भीष्म प्रतिज्ञा है*
है सपना कुछ कर जाने का
दुनिया में छा जाने का
बेमोल जिन्दगी को
अनमोल बना दिखलाने का
हैं मुट्ठी भर अरमान मेरे
जग में छा जाने का
कौशल है
यदि ठान लिया कुछ करना है!
तो मेरे कदमों नीचे भूतल है
प्रज्ञा’ नहीं है यूँ ही नाम मेरा
मुझमें सचमुच प्रज्ञा है
जो ठाना करके दिखलाया
मेरा प्रण तो भीष्म प्रतिज्ञा है….
जब आपका प्रणब भीष्म प्रतिज्ञा के समान है तो आप अवश्य ही सफलता को हासिल करेंगी और सफलता आपके कदमों तले अवश्य ही होगी यह शुभकामना है मेरी
बहुत खूब, अतिसुन्दर
बहुत खूब