मेरी आँखों को ऐसी हँसी आ रही है

मेरी आँखों को ऐसी
हँसी आ रही है
जैसे मोमबत्ती जलकर
पिघलती जा रही है
कुछ जल गई रौशनी की फिक्र में
कुछ बेखबर-सी
पिघलती जा रही है
पिघल गई
धागे को जलाने के जश्न में
आधी जली तम मिटाने के लिए
आधी पिघलकर
खुदी में लिपटती जा रही है
नश्वर है
ये अंधेरा और रात का साया,
बता रही है ये और
मचलती जा रही है….

Comments

8 responses to “मेरी आँखों को ऐसी हँसी आ रही है”

  1. Geeta kumari

    मोमबत्ती के पिघलने की दास्तान बयां करती हुई बहुत सुंदर कविता

    1. कविता के भाव को समझने हेतु हार्दिक धन्यवाद दी

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