मेरी तन्हाईयों को

मेरी तन्हाईयों को अब
और ना सताओ
मुझे रातों में अब
और ना जगाओ
यूँ तो हम भी तुम्हें इश्क करते हैं
पर बार-बार मेरे दिल को यह एहसास ना दिलाओ।।

Comments

2 responses to “मेरी तन्हाईयों को”

    1. आभार आपका 

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