मेरी परिभाषा

आज मैं यहाँ खड़ा हूँ,
खुद को परिभाषित करने के लिए।
शब्दों के रंग में खेलते हुए,
अपनी भावनाओं को समर्पित करने के लिए।

कविता के सागर में डूबकर,
अपनी मनचाही उड़ान भरने के लिए।
विचारों के परवाने उड़ाते हुए,
कविता के आकाश में संगीत की गांठ बुनने के लिए।

हर पंक्ति में अपनी आत्मा को छिपाकर,
वाणी की आवाज़ में झलकते हुए।
सबको मंत्रमुग्ध करने के लिए,
शब्दों के जादू में खुद को समर्पित करने के लिए।

कविता की दुनिया में खो जाते हुए,
अपने सपनों को पंखों में बांधने के लिए।
भावों की लहरों में बहते हुए,
अपनी छाप छोड़ने के लिए।

कविता का सफ़र जारी रहेगा,
हर उड़ान पर नया संगीत बनाते रहेंगे।
शब्दों की जादूगरी में खो जाएँगे,
खुद को वहीं पाते रहेंगे।

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