मेरी शिक्षक मेरी मां

मेरी शिक्षक मेरी मां ही तो है ,
सिखाया उसने चलना ,
बोलना और पढ़ना -लिखना।
अर्थ न जाने कितने समझाएं ।
पूछो कितनी ही बार ;वह प्रश्न ,
फिर भी कभी ना डांट लगाए ।
मुस्कुराकर ;माथे को चुमे
और प्रेम से बतलाए।

Comments

12 responses to “मेरी शिक्षक मेरी मां”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सच में मां से बढ़कर कोई नहीं
    बहुत सुंदर पंक्तियां

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद सर

  2. सुन्दर अभिव्यक्ति
    माँ जीवन की पहली गुरु मार्गदर्शिका कहाती है।

    1. Pratima chaudhary

      सही कहा आपने! बहुत बहुत आभार सुमन जी

    1. Pratima chaudhary

      बहुत बहुत आभार सर

    1. Pratima chaudhary

      बहुत बहुत आभार सर

  3. Geeta kumari

    वाह, प्रतिमाजी ये सत्य है कि मां ही प्रथम शिक्षक होती है।

    1. Pratima chaudhary

      बिल्कुल सही कहा आपने! बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  4. Deep

    ma ki jagah koi nahi le sakta..
    bahut achha likha he maa ke liye

    1. Pratima chaudhary

      बिल्कुल सही कहा आपने
      बहुत बहुत धन्यवाद

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