मेरी शिक्षक मेरी मां ही तो है ,
सिखाया उसने चलना ,
बोलना और पढ़ना -लिखना।
अर्थ न जाने कितने समझाएं ।
पूछो कितनी ही बार ;वह प्रश्न ,
फिर भी कभी ना डांट लगाए ।
मुस्कुराकर ;माथे को चुमे
और प्रेम से बतलाए।
मेरी शिक्षक मेरी मां
Comments
12 responses to “मेरी शिक्षक मेरी मां”
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सच में मां से बढ़कर कोई नहीं
बहुत सुंदर पंक्तियां-

धन्यवाद सर
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सुन्दर अभिव्यक्ति
माँ जीवन की पहली गुरु मार्गदर्शिका कहाती है।-

सही कहा आपने! बहुत बहुत आभार सुमन जी
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बहुत खूब
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बहुत बहुत आभार सर
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सुंदर
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बहुत बहुत आभार सर
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वाह, प्रतिमाजी ये सत्य है कि मां ही प्रथम शिक्षक होती है।
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बिल्कुल सही कहा आपने! बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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ma ki jagah koi nahi le sakta..
bahut achha likha he maa ke liye-

बिल्कुल सही कहा आपने
बहुत बहुत धन्यवाद
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