मेरे राम मेरे प्रभू,
आज्ञा हो तो मै कुछ कहूँ,
कहने को तो कई बाते है मन मे,
मन विचलित है,
कोतुहल मचा है जीवन मे |
पीड़ा बहुत है,
कई बीमारी है इस तन मे,
पीड़ा तो तुम्हे भी हुई होगी,
जब कष्ट झेलते भटके वन मे |
बस इतना कहना चाहता तुमसे,
माँ मिली है मुझे कर्म से,
माँ के कष्ट मुझे दे देना,
जब भी वो कराहे दर्द मे |
मेरे राम
Comments
10 responses to “मेरे राम”
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Why do you write poem in parts?
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क्योंकि वही शब्द अलग असर छोड़े
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Nice
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धन्यवाद
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वाह बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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जय श्री राम
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Good
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Nice
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Good
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