Author: राम नरेशपुरवाला

  • पूस की रात

    पूस की रात मे
    दुनिया देख रही थी सपने
    आलस फैला था चहु ओर
    रात भी लगी थी ऊँघने.

    मैंने छत्त से देखा
    बतखों के झुण्ड को तलाब मे
    तीर सी ठण्डी हवा चलने लगी थी
    रात के आखरी पहर मे.

    मछलिया खूब उछल रही थी
    तेर रही थी इधर -उधर
    सोचा हाथ लगाउ उनको
    पर ना जाने छुप गई किधर.

    तभी कुछ शोर सुनाई दिया आसमान मे
    बागुले उड़ रहे थे एक पंक्ति मे
    जैसे वो सब आजाद है
    मेने भी खुद को आजाद महसूस किया उनकी
    स्वछंद संगती मे.
    ….. राम नरेश…..

  • दुआ

    आते नहीं मुझसे मिलने
    तुम हमसे अक्सर ये गिला किया करते
    छोड़ दिया है उन गलियों में जाना
    जिनमें हम कभी मिला करते थे
    चाह कर भी तेरे दर पे ना आ सके
    तेरी सलामती की हमेशा दुआ करते थे
    बदनाम ना हो जाओ तुम कहीं
    मन ही मन डरा करते थे

  • खुदगर्ज

    सोचो अगर हर जीव खुदगर्ज हो जाता
    पल पल हर पल थम सा जाता
    ना पेड़ देता फल कोई वह पेड़ पर ही सड़ जाता
    वह जाओ ना देते तो पथिक रास्ता कैसे तय कर पाता
    नदिया जो पानी ना देती हर जीव प्यासा मर जाता
    वह समंदर में ना गिरती तो हर घर पानी में बह जाता
    ना मां देती जन्म बच्चे को जीवन मरण चक्कर रुक जाता
    जो हो जाती खुदगर्ज वह कोई घर नहीं बस पाता
    हवा अगर थम जाती तो दम सभी का घुट जाता
    वह ना हर जगह बहती तो जीवो का प्राण पखेरू उड़ जाता
    दयावान होना जरूरी है दया ना होती तो सृष्टि का सर्जन ना हो पाता
    खुदगर्ज जो हो जाता ब्रह्मांड खुद ही पैदा होकर खुद ही वह मर जाता

  • मोह

    उड़ चलता है हर पक्षी घोंसला बनाने
    होते ही उम्मीदों का सवेरा
    श्याम को थक्कर ढूंढता फिरे
    अपना ही रैन बसेरा
    भटकती फिरे हर मधुमक्खी
    फूल फूल पत्ता पत्ता
    करके शहद इकट्ठा
    हजारों फूलों को छानती
    बार-बार पहुंचती देखने अपना छत्ता
    इंसान भी मोह का पुलिंदा हैमो
    परिवार की फिकर उसे सताती रहती है
    मुंह के बस में हर प्राणी
    सृष्टि सारी यही कहती है

  • भौर

    बाला घट भरने चल पड़ी
    भौर की लालिमा नभ मे बिखर पड़ी
    पगो से रोंदते हुए ओंस की बूँद
    बाला पनघट की ओर मुड़ चली.

    रस्सी खींचती सुकोमल हाथों से
    बिन कहे ही कहती बातें आँखों से
    हार गया तुम्हारी मनमोहनी चालो से
    सुंदरता का बखान कैसे करू मै तुछ बातों से.

    घट सर पर रख मंद- मंद मुस्काए
    नखरे करें और खूब इतराए
    कमरिया तेरी लचकती जाये
    अधजल गगरी छलकती जाये.

    देखता उसे मै रह गया
    गाँव की गलियों मे वो खो गई
    कुछ डग भरे उसकी ओर
    फिर ना जाने कहाँ घुन्ध मे वो ओझल हो गई.

    ध्यान उसका आता बार बार
    उस एहसास को कैसे भूलूँ
    काश ! ये मनोरम दृश्य
    मै हर रोज ही देखूँ.

    अर्थ :-
    मनोरम -प्यारा
    अधजल -आधा भरा घड़ा
    रोंदते -दबाते, कुचलते

  • मजदूरो के बच्चे

    मेरे घर के सामने
    मजदूरो का जमावड़ा लगा था
    ईंटो का ढेर बड़ा था
    शायद कोई बंगला बन रहा था.

    कोई मजदूर ईंटे ढो रहा था
    कोई दीवार चिन रहा था
    हर मजदूर काम मे लगा था
    बच्चों की कोई परवाह नहीं कर रहा था.

    हम अपने बच्चों को
    धूल भी नहीं लगने देते है
    और मजदूरो के बच्चे देखो
    किस तरहा मिटटी मे लेटे है.

    मिटटी उड़ा उड़ा कर
    खेल रहे है मजदूरों के बच्चे
    सब अपने कर्मो का खाते
    ये कहते है हम वचन सच्चे

    गाढ़ा पसीना बहाया
    अपने परिवार के लिए कमाया
    शाम को खरोंच भरे हाथों से
    बच्चे को गोद मे उठाया.

    म से मिटटी म से मजदूर
    नाता मिटटी से गहरा है
    कितना शोर मचा ले बेचारे
    ना सुनेगा उनकी, समाज हमारा बहरा है.

  • पथिक

    जीवन की राह को
    नंगे पैर ही नापना पड़ता है
    मिटटी की गर्मी को
    छूकर ही भापना पड़ता है

    चलते चलते कभी
    रेत के टीले राह रोक लेते है
    मै डर जाऊ मै घबराऊ
    इसका ही तो मजा लोग लेते है

    राह मे कांटे आए जब
    रोता चलता रहा मै पथिक
    पर जीना छोड़ दू
    मन मे विचार ना आया तनिक.

    सारा मनोबल टूट गया मेरा
    जब राह मे एक बड़ा पत्थर आया
    उससे भी मै बच गया
    क्योंकि साथ था मेरे माँ-बाप का साया.

    एक मोड़ पे मुझे कुछ लोग मिले
    नेंन उनके ईर्ष्या और द्वेष से भरे
    मैंने ध्यान ना दिया उनपर
    पर चुगलियां करें बगैर उनको कैसे सरे.

    मैंने सोच लिया है बस
    मै चलता ही जाऊंगा
    तभी तो जीवन की रहो का
    पथिक मै कहलाऊंगा.

  • नशा

    तू होनहार था
    तू सबसे होशियार था
    सबका तू गुरुर था
    अपनी प्यारी सी जिंदगी मे
    सपना तूने भी कोई
    देखा तो जरूर था

    झुक गया गमों के आगे
    दुनिया नाचे पैसे के आगे
    तब तो तू मजबूर था
    क्यों खोया लत मे ऐसा
    बहाया पानी की तरहा माँ-बाप का पैसा
    गुनाह करना भी तुझे मंजूर था
    तुझपे नशे का ऐसा भी क्या सरूर था

    छूटते जा रहे अपने
    तोड़े क्यों तूने अपनों के ही सपने
    ये करना क्या जरूर था
    तू इतना क्यों मजबूर था
    भागता रहा बस नशे के पीछे
    देखे ना माँ के आँसू बैठा रहा आंख मींचे
    तू इतना क्यों मगरूर था
    जाने कैसा चढ़ा तुझपे ये फितूर था.

    फिर से हाथ थाम अपनों का
    पुलिंदा बना नये घोंसलों का
    छोड़ दे ये लत
    दे खुदको भी कुछ फुर्सत
    छोड़ उसको जो सर चढ़ा जनून था

    फेंक शराब की बोतलों को
    जिनका लगा घर पर हुजूम था
    खुद की तू मदद कर
    कोई ना करें चाहे तू खुद की तो कदर कर
    बसा ले वो आशियाना फिर से
    जिसमे तुझे सकून था
    जी वही जिंदगी
    जिसमे तू भी मासूम था.

  • आतिशबाजी

    वो आतिशबाजी किस काम कि
    जो कानो को बहरा कर दे
    अगले ही दिन प्रदूषण से
    वातावरण को धुए से भर दे.

    मै तो चाहूँ ऐसी लड़ी जलाना
    कि जिंदगी फुलझड़ी जैसी जगमग हो
    चाहूँ ऐसा अनार जलाना
    जिसमे खुशियों कि फुहार पग पग हो.

    ऐसा फोड़ू मुस्कुराहटो का सुतली बम
    जो लोगो का दिल उत्साह से भर दे
    ऐसा जलाऊ उमंगो का रॉकिट
    जो आसमान रंगबिरगी खुशियों से भर दे.

  • दीपावली का अगला दिन

    हम अपने घरों का का
    कोना कोना चमकाते है
    ताकि अच्छे से मना सके
    दीपावली का दिन
    और कितना कूड़ा फैला देते है
    दीपावली के दिन ही दिन.

    छिड़कते है गंगाजल
    वातावरण स्वच्छ बनाने को
    ताकि घर पवित्र रहे दीपावली के दिन
    और इतने पटाखे फोड़ते है कि
    धुआँ धुआँ कर देते है
    दीपावली के अगले ही दिन.

    काम से छुट्टी करके मनाते है
    दीपावली का दिन
    तीन गुना गाड़ियां भगाते है सड़को पर
    दीपावली के अगले ही दिन.

    देश का सबसे बड़ा त्यौहार है
    दीपावली का दिन
    देश का सबसे बड़ा प्रदुषण प्रेरक है
    दीपावली का अगला ही दिन.

  • सर्दियाँ

    याद करना कभी
    तीस साल पहले क़ी सर्दियाँ
    बिस्तर से ना निकलने की
    कभी होती थी मार्जियाँ.

    याद करना कभी
    तीस साल पहले की सर्दियाँ
    स्कूल से छुट्टी मरने के लिए
    खूब लगाते थे अर्जियाँ.

    याद करना कभी
    तीस साल पहले की सर्दियाँ
    रजाई मे ही पड़े रहते
    और खूब खेलते थे पर्चियाँ.

    याद करना कभी
    तीस साल पहले की सर्दियाँ
    वो सुहाना मौसम अब कहाँ
    ना जाने अब कहाँ गई वो इतनी ठंडी सर्दियाँ.

  • औरत

    औरत तेरी कहानी
    जैसे बहता पानी
    महानता तेरी जगमानी
    वेग है तू जबरदस्त तूफानी.
    पर्वतों मे तू नदी वेगवाहिनी
    मैदानों मे तू स्थिर विरानी
    खेतो मे तू अन्न गर्भ धारणी
    महान होकर भी तू सदाचारणी.
    धरातल मे तू पाताल वासनी
    पालन करे तू पालनहारिणी
    गृह उद्धारक तू ह्रदय वासनी
    सृष्टि का आरम्भ तू और जग कल्याणी.

  • फिर आ जाओ मेरे पास

    फिर से आ जाओ मेरे पास
    मेरी हर धड़कन तेरी राह तकती है
    सुन्न पड़ गया है दिमाग़
    बस इसमें सोच तेरी ही बसती है
    कानो मे जाने के बाद तेरे
    हंसी तेरी ही गूंजती है.
    आँख बंद करता हूँ जब भी
    क्षतिज के छोर पर, मुझे तू ही दिखती है.

  • चुनाव प्रचार

    गलियों मे चुनाव प्रचार के ढ़ोल आजकल बजते रहते है
    वोट मुझे ही देना भाई, सभी यही कहते है
    मीठा बोलने से उनके, भावनाओ मे हम नहीं बहते है
    जब दाल ना गले उनकी, हमपर धर्म प्रहार वो करते है.

    हिन्दू कहे, मै जीत गया तो मंदिर मै बनवाऊंगा
    मुस्लिम कहे, मै जीत गया तो मस्जिद मै बनवाऊंगा
    बेवकूफ़ अच्छे से बना सकता हूँ तुमको
    जीतने के बाद ठेंगा तुम्हे दिखाऊंगा.

    चाहे कोई भी जीते
    जनता जरूर फंसती है
    कभी बिजली की कटौती
    कभी पानी की बूँद को भी तरसती है
    धोखे के समंदर मे डबोते वो हमको
    क्योंकि गहरे पानी मे जनता की कश्ती है.

  • छलांग

    गिर गया तो क्या हुआ
    पाना मुकाम अभी बाकी है
    जान भर ली है पैरों मे मैंने
    आसमां तक ऊँची छलांग अभी बाकी है.

  • राधा- कृष्ण

    कृष्ण ने बहुत अटखेलियां की
    गोपियों के संग नदियों -तालाबों में,
    ना प्यार मिला ऐसा कहीं
    जो देखा राधा की आँखों में.

    वचन भरे जीवन मरण के
    लेकर हाथों को हाथों में,
    स्मृतियाँ वो ना कभी भूलेंगी
    जो कट गई बातों बातों में.

    ना अब रही मिलन की बेला
    ना सुगंध रही अर्पित फूलों में,
    ना पूरे दोनों एक दूजे के बिन
    ना राह मिलन की इन कर्कश शूलों मे.

    सदा युगल रहे राधा कृष्ण
    साथ ना छूटा सुख दुखो मे,
    प्रेम कहानी अमर है उनकी
    कही जाएगी युगो -युगो मे.

  • करवा चौथ

    आज बहुत सुन्दर लग रही हो तुम
    इस चाँद से चेहरे पर कुछ कहना चहुँ तो
    पहले ही शर्मा कर हाथो से
    चेहरे को ढक लेती हो तुम.

    मुझे देखकर जो तेरे चेहरे की
    लालिमा बढ़ती जाती है
    देख- देख तुझे मेरे दिल की कलि
    खिलती जाती है.

    सबको रात का इंतजार है
    देखने चमकते चाँद को दिल बेक़रार है
    इतना सुन्दर श्रृंगार किया है
    दिल तो लूटने को भी तैयार है.

    आज सुनती सभी महिलाये
    करवा चौथ की कहानी
    सुनो प्रिया, श्रृंगार सहित श्रृंगार रहित
    तुम ही सदा रहोगी मेरे दिल की रानी.

  • कर्मठ

    आलसी लोग जो ना मेहनत करते
    दिन के उजयारो मे
    देखा रात को स्ट्रीट लाइट के निचे पड़ते
    एक बच्ची को अंधरे गलयारो मे.

    सर्द हवाओ में मैंने उसे देखा पढ़ते
    कांप -कांप कर
    जाने क्यों पढ़ती है वो
    जागकर रात- रात भर.

    इतनी ठण्ड थी की कोई अभागा रोए
    तो आंसू भी जम जाए
    इस हाल में पढ़ते देख उसे
    किसी की सांसे भी थम जाए.

    अगली सुबह मैंने उसे जब
    उसे फूल बेचते देखा
    सोचा मन मे
    की ये कैसा है भाग्य का लेखा
    एक दिन जरूर बदल देगी
    वो अपने हाथो की रेखा.

    हमेशा आलसी को फूलों के बिस्तर
    और कर्मठ को ठोकरें ना मिलेंगी
    एक दिन ऐसा आएगा
    जब सारी खुशियाँ आधी -आधी बटेंगी.

  • बेहरुपीये

    लोग बन कर फिरते है बेहरुपीये
    ताकि तुमको छल सकें
    कुछ रास्ते बिन काँटों के भी छोड़ दो
    जिनपर अनजान राही चल सकें

  • प्यार का लम्हा

    चाहा सिर्फ तुझको मैंने
    साथ मेरे अब तेरी परछाई भी नहीं
    जी लिया प्यार का हर लम्हा
    चले जाने से तेरे अब कोई रुसवाई नहीं

    वो जा चुकी है जिंदगी से
    भूलूंगा ये सचाई नहीं
    जाने के बाद तेरे
    मै तुझे याद करू
    इतनी तुझमे अच्छाई नहीं

  • दौर

    दौर चल रहा है
    धकेल कर जितने का
    कुचलने वाली इस भीड़ मे शामिल मत होना
    आगे बढ़ने के लिए
    दौड़ जरूर लगाना
    पर किसिकी होड़ मे शामिल मत होना
    …… राम …….

  • बुलंद

    ठोकर खाकर जमानो मे
    बुलंद हुए आसमानों मे
    जो फिरते आग लिए अपने सीनो मे
    वो रोशनी ढूंढ़ते नहीं बुझे हुए चिरागो मे

  • गरीब कवि

    भूखे पेट जीना सीखा मैंने
    पेट भर खाने की जरुरत भी समझी नहीं |

    नंगे पैर दौड़ पड़े सफर में
    बस भागता रहा
    ना देखा, पाँव में चप्पल है के नहीं |

    बुझी मशालों को मैंने शब्दों से जाला डाला
    इतनी भड़का दी आग के
    सूरज के आगे,
    इसकी चमक कभी धुंधली पड़ी नहीं |

    धरती से चाँद तक मैंने लिख डाला
    ब्रम्हांड को भी छू लेता
    पर छलांग लगाने के लिए
    गरीब कवि के पास दो गज ज़मीन भी नहीं.
    “”””””””….राम नरेश…. “”””””””

  • मेहनत

    दुनिया राह में अडचन पैदा करेगी
    धोखा देगी, फरेब करेगी
    तेरे पास कब कामयाबी होगी?
    इसका जवाब सिर्फ तेरी मेहनत देगी |

  • हौसले

    हाथ की आड़ी टेड़ी लकीरें
    क्या खाख बताएगी तकदीरे
    उड़ जा होंसलों के आसमान में
    क्या बिगड़ लेंगी जर्ज़र समाज की जंजीरे
    🌋🗽♨️✈️🚀⏳️

  • गाँव की एक रात

    काली आधी रात में,
    दुनिया देख रही थी सपने |
    आलस का आलम था चहु ओर
    रात भी लग रही थी ऊंघने |

    तब मैंने छत से देखा,
    बतखो के झुण्ड को तलाब में |
    ठंडी हवा भी चलने लगी,
    रात के आखरी पहर मे |

    मछलिया खूब उछाल रही थी,
    फड़ फाड़ा रही थी इधर उधर |
    सोचा हाथ लगाउ उनको,
    पर ना जाने गई किधर |

    तभी कुछ शोर सुनाई दिया आसमान में,
    बागुले उड़ रहे थे एक पंक्ति में |
    जैसे वो सब मस्त है आजादी में,
    मैंने भी आजादी महसूस की उन सबकी संगति मे |

  • राम नाम का तीर

    स्वार्थी कुटिल लोगो पर
    ध्यान ना दो,
    जैसे बहता नदिया का नीर |
    विपरीत परिस्थिति में भी अडिग रहो,
    ना होना कभी अधीर |

    जो दुखी करें सबको
    ओर बने बड़ा ही वीर
    ऐसे दुष्टो के सीने मे
    राम नाम का तीर
    घाव करे गंभीर

    ,🌺🌻🌷🌹,,,,,,,,,,,, जय श्री राम,,,,,,,,,,,,,,,,, 🌼🌹🥀🌺

  • राम नाम

    जब डगमगा जाये तेरा हौसला,
    अपने दिल को पत्थर समझ लेना |
    राम नाम लिखकर उसपर,
    दरिया में फेंक देना |
    जो होगा देखा जायेगा,
    राम नाम पे भरोसा कर लेना |
    कहना “हे राम ”
    तुझ पर सब छोड़ दिया,
    मेरे बिगड़े काम सभी बना देना |

  • मेरे राम

    मेरे राम मेरे प्रभू,
    आज्ञा हो तो मै कुछ कहूँ,
    कहने को तो कई बाते है मन मे,
    मन विचलित है,
    कोतुहल मचा है जीवन मे |
    पीड़ा बहुत है,
    कई बीमारी है इस तन मे,
    पीड़ा तो तुम्हे भी हुई होगी,
    जब कष्ट झेलते भटके वन मे |
    बस इतना कहना चाहता तुमसे,
    माँ मिली है मुझे कर्म से,
    माँ के कष्ट मुझे दे देना,
    जब भी वो कराहे दर्द मे |

  • राम

    राम नाम लेकर
    मन को सकून बड़ा मिलता है
    मन प्रफुल्लित होता है मेरा
    ह्रदय कमल खिलता है
    याद आते हो तुम्ही राम
    जब जीवन डगमग हिलता है

  • वेदना

    जीवन मेरा बहुत कठिन है,
    पर ना चाहूं मुड़कर देखना |
    रख ली है कुछ पुरानी यादे समेटकर,
    ना चाहूँ उनको फेंकना |
    झूठा मुखौटा लगाकर,
    क्यों चाहते हो, जज्बातों से यूँ खेलना |
    दिल दुख रहा, मन तड़प रहा,
    किससे कहूं मै मन की वेदना |
    तनो के तीर मारकर,
    छोड़ दो मेरे दिल को यूँ भेदना |

  • संघर्ष

    बिना संघर्ष के,
    व्यक्ति मृत के समान है
    मेहनत करके जीने वाला
    संघर्षकर्ता ही महान है |🚩🌍🗽

  • खुद्दार

    लोगो की नफरतो के आगे,
    खुद्दार कभी झुकता नहीं|
    अडचन चाहे कितनी भी आये,
    चलते चलते वो रुकता नहीं|
    महफिलों की रौनको से,
    फर्क उसे पड़ता नहीं|
    संघर्ष की मशाल लिए वो,
    भागता हुआ थकता नहीं|
    दिखावे के सुन्दर तालाब मे,
    कमल कभी खिलता नहीं|
    कीचड मे सना कमल का जीवन,
    स्वच्छ जल की चाह रखता नहीं|
    खुदार बनो,
    जीवन को कर्म की तरफ मोड़ दो
    मेहनत कर के कमा लो,
    भीख, भिखारी के लिए छोड़ दो |

  • महात्मा गाँधी

    गुलामी की धांस में अत्याचारों की बांस में
    देश था बिलकुल सड़ गया |
    तब उठ खड़ा हुआ एक अहिंसक योद्धा,
    जो लाठी लिए फिरंगी से लड़ गया |
    कुचलता हुआ अंग्रेजी सरकार के इरादे,
    जनक्रांति लिए वो आगे बढ़ गया |
    अंग्रेज देना चाहते थे धोखा,
    पर वो पूर्ण स्वराज पर अड़ गया |

    बर्तानिया सरकार के खिलाफ,
    शोले भड़क रहे थे हर मन में |
    जलाकर विदेशी वस्तुएँ ,
    आजादी की आग लगा दी हर जन में |
    भारत छोड़ो आंदोलन का तूफान ऐसा चलाया,
    और जोश भर दिया हर देशवासी के तन में |
    बापू तुमने आजादी दिलाई,
    याद रहेगा हमें पुरे जीवन में |

    आजादी का सूरज उगा,
    पर ग्रहण लगा बंटवारे का |
    रोए बापू रोए भारत,
    दुःख था छूटते अँगनारे का |
    नये भारत के स्वर्णिम भविष्य के,
    आँखों में तुम्हारे कई सपने थे |
    पर घात लगाए क्रूर दुष्टाचारी,
    नाथू राम जैसे दुश्मन अपने ही थे |

    आजाद आसमान हमें दिया,
    और गुलामी की जंजीरो को तोड़ चले |
    खुद मरकर जीवनदान हमें दिया,
    और हर मोती को एक मला में जोड़ चले |
    लपेट तिरंगा झंडा शान से,
    अपना विजय रथ अंतिम यात्रा की ओर मोड़ चले |
    कभी ना ख़त्म होने वाले आँसू,
    अब हमारी आँखों में छोड़ चले |

  • मर्ज़ी

    प्रेयसी — तुम्हे मै प्यार करू या ना करू,
    ये है मेरी मर्ज़ी |
    तुम्हे मुझसे प्यार है तो,
    सिर्फ लगा सकते हो अर्जी |
    प्रेमी — सच्चा प्यार करता हूँ तुमसे,
    नहीं आशिक हूँ मै फ़र्जी |
    अब मिलने तुमसे तब ही आऊंगा,
    जब हो तुम्हारी मर्ज़ी |

  • सजा

    तुम्हे हमसे प्यार नहीं,
    झूठ बोलकर ये दग़ा ना दो |
    गलतियां सबसे होती है,
    अलग होने की ये सज़ा ना दो |

  • अक्स

    दूर कर दोगे हमको खुद से,
    हमसे दूर खुद हो जाओगे |
    खुद का चेहरा देखोगे आईने मे,
    तो हमारा ही अक्स पाओगे |

  • पहचान

    खुद की सुनेगा तो पहचान मिलेगी असली
    दुसरो की सुनेगा तो इंसान बनेगा तू नकली

  • हाल- ए -दिल

    कवि तो होते है बदनाम
    आश्कि की रहो मे भटकते फिरते है|
    दोष लगता है उनपर कलम से छेड छाड़ का
    वो तो बस अपना हाल -ए -दिल बयां करते है |

  • ईश्वरमय

    धन का सागर मैंने पाया
    तब मै अंधकार मे खो गया |
    जब खुद को खो दिया
    तब मै ईश्वरमय हो गया |

  • ईश्वरमय

    धन का सागर मैंने पाया
    तब मै अंधकार मे खो गया |
    जब खुद को खो दिया
    तब मै ईश्वरमय हो गया |

  • समय

    खोया समय
    फिर कब आता है |
    अन्याय पर ज्ञानी का मौन
    विनाश लाता है |

  • बात

    भले की बात जरूर कहो
    चाहे खोटी हो या खरी
    सही समय पर सही बात कहो
    पल पल चलती जाये घड़ी

  • पानी

    सुनो आज तुम्हे सुनाऊ
    पानी की कहानी
    कीमती है पानी
    कहती थी मेरी नानी |

    कभी अमृत जैसा मीठा था
    मेरे गांव का ये पानी
    अब विषैला होता जा रहा
    हर घट- घट का पानी |

    बचपन मे पानी पिया
    अब विष पीते पीते आ गई जवानी
    बुढ़ापा शायद ना आये
    जहरीला हो रहा अब देश का भी पानी |

    गली गली मे बर्बाद हो रहा
    नालियों मे बह गया स्वच्छ पानी
    आज बचाओ मेरे भाई
    कभी अंतिम समय ना गंगाजल मिले और ना मिले ये
    ~~~~~~पानी ~~~~~~~~~~~~
    – – – – – – – – – – – – – – – – – राम नरेश ——

  • कामयाबी

    जो लोग मेहनत करते है
    किस्मत उनके आगे आगे चलती है
    आग जिसमे लगन की जलती है
    कामयाबी उसी को मिलती है

  • काश !देश का शासन कलम चलती

    काश !
    देश का शासन कलम चलती,
    निर्दोष को न्याय दिलाती,
    और दोषी पर कहर बरसाती,
    काश !देश का शासन कलम चलाती |

    अन्याय का नाम ना होता,
    भ्रष्टाचार का काम ना होता,
    दुष्ट नेताओं को होती शब्दों की फांसी,
    न्याय का फंदा ऐसा कस्ता,
    ना जान जाये और ना गले से उठ पाए खांसी,
    काश ! देश का शासन कलम चलती |

    वो राजकवि ऐसा होता,
    मुजरिमों पर भावनाओ के जाल फेंकता,
    तिल-तिल कर जीते अपराधी,
    आंसू आँख से रुक ना पता,
    फिर तो गरीब जनता रहती राजी,
    कहती, वाह ! क्या चाल चली कविराज जी,
    काश ! देश का शासन कलम चलती |

    देश फिर से अहिंसावादी होता,
    “अहिंसा परमो धर्म ” कवि का नारा होता,
    देश फिर से सोने की चिड़िया कहलाता,
    सब को मिलती असली आजादी,
    बिना लड़े ही न्याय दिलाती,
    काश !
    देश का शासन कलम चलती |
    ………राम नरेश……..

  • त्यौहार

    ये मौसम ऐसा आया है
    जिसकी हवाओं मे त्योहारों की खुशबू आती है |
    नई ख़ुशी और नई उमंगो का
    एहसास दिल मे जगती है |
    दीये की जलती जोत
    निश्चय दृढ़ बनती है |
    गलियों मे बजता शादियों का ढ़ोल और शेहनाइया
    फिर से शादी का उत्साह जगती है |
    पूरे भारत मे खुशियों का माहौल है
    ये भावना गर्व मेरा बढ़ती है |

  • दिलजला

    अंजनी रहो पर चलते चलते
    मै खुशियों से कब मिला हूँ
    दुसरो की खुशियों को देख
    जलने वाला मै सबसे बड़ा दिलजला हूँ

  • मन

    मन का मैल धोने के लिए
    पूरी गंगा नाहा लिए
    तन का मैल तो धो लिया
    मन का मैल साथ लिए चले आ गये

  • आवाज़

    आवाज़ ऐसी ना हो
    जो कुत्ते बिल्लियों के शोर मे दब जाये
    आवाज़ ऐसी हो जो भीड मे भी बार बार सुनाई दे

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