पूस की रात मे दुनिया देख रही थी सपने आलस फैला था चहु ओर रात भी लगी थी ऊँघने. मैंने छत्त से देखा बतखों के झुण्ड को तलाब मे तीर सी ठण्डी हवा चलने लगी […]

आते नहीं मुझसे मिलने तुम हमसे अक्सर ये गिला किया करते छोड़ दिया है उन गलियों में जाना जिनमें हम कभी मिला करते थे चाह कर भी तेरे दर पे ना आ सके तेरी सलामती […]

उड़ चलता है हर पक्षी घोंसला बनाने होते ही उम्मीदों का सवेरा श्याम को थक्कर ढूंढता फिरे अपना ही रैन बसेरा भटकती फिरे हर मधुमक्खी फूल फूल पत्ता पत्ता करके शहद इकट्ठा हजारों फूलों को […]

बाला घट भरने चल पड़ी भौर की लालिमा नभ मे बिखर पड़ी पगो से रोंदते हुए ओंस की बूँद बाला पनघट की ओर मुड़ चली. रस्सी खींचती सुकोमल हाथों से बिन कहे ही कहती बातें […]

मेरे घर के सामने मजदूरो का जमावड़ा लगा था ईंटो का ढेर बड़ा था शायद कोई बंगला बन रहा था. कोई मजदूर ईंटे ढो रहा था कोई दीवार चिन रहा था हर मजदूर काम मे […]

तू होनहार था तू सबसे होशियार था सबका तू गुरुर था अपनी प्यारी सी जिंदगी मे सपना तूने भी कोई देखा तो जरूर था झुक गया गमों के आगे दुनिया नाचे पैसे के आगे तब […]

वो आतिशबाजी किस काम कि जो कानो को बहरा कर दे अगले ही दिन प्रदूषण से वातावरण को धुए से भर दे. मै तो चाहूँ ऐसी लड़ी जलाना कि जिंदगी फुलझड़ी जैसी जगमग हो चाहूँ […]

हम अपने घरों का का कोना कोना चमकाते है ताकि अच्छे से मना सके दीपावली का दिन और कितना कूड़ा फैला देते है दीपावली के दिन ही दिन. छिड़कते है गंगाजल वातावरण स्वच्छ बनाने को […]

याद करना कभी तीस साल पहले क़ी सर्दियाँ बिस्तर से ना निकलने की कभी होती थी मार्जियाँ. याद करना कभी तीस साल पहले की सर्दियाँ स्कूल से छुट्टी मरने के लिए खूब लगाते थे अर्जियाँ. […]

औरत तेरी कहानी जैसे बहता पानी महानता तेरी जगमानी वेग है तू जबरदस्त तूफानी. पर्वतों मे तू नदी वेगवाहिनी मैदानों मे तू स्थिर विरानी खेतो मे तू अन्न गर्भ धारणी महान होकर भी तू सदाचारणी. […]

फिर से आ जाओ मेरे पास मेरी हर धड़कन तेरी राह तकती है सुन्न पड़ गया है दिमाग़ बस इसमें सोच तेरी ही बसती है कानो मे जाने के बाद तेरे हंसी तेरी ही गूंजती […]

गलियों मे चुनाव प्रचार के ढ़ोल आजकल बजते रहते है वोट मुझे ही देना भाई, सभी यही कहते है मीठा बोलने से उनके, भावनाओ मे हम नहीं बहते है जब दाल ना गले उनकी, हमपर […]

कृष्ण ने बहुत अटखेलियां की गोपियों के संग नदियों -तालाबों में, ना प्यार मिला ऐसा कहीं जो देखा राधा की आँखों में. वचन भरे जीवन मरण के लेकर हाथों को हाथों में, स्मृतियाँ वो ना […]

आज बहुत सुन्दर लग रही हो तुम इस चाँद से चेहरे पर कुछ कहना चहुँ तो पहले ही शर्मा कर हाथो से चेहरे को ढक लेती हो तुम. मुझे देखकर जो तेरे चेहरे की लालिमा […]

आलसी लोग जो ना मेहनत करते दिन के उजयारो मे देखा रात को स्ट्रीट लाइट के निचे पड़ते एक बच्ची को अंधरे गलयारो मे. सर्द हवाओ में मैंने उसे देखा पढ़ते कांप -कांप कर जाने […]

चाहा सिर्फ तुझको मैंने साथ मेरे अब तेरी परछाई भी नहीं जी लिया प्यार का हर लम्हा चले जाने से तेरे अब कोई रुसवाई नहीं वो जा चुकी है जिंदगी से भूलूंगा ये सचाई नहीं […]

भूखे पेट जीना सीखा मैंने पेट भर खाने की जरुरत भी समझी नहीं | नंगे पैर दौड़ पड़े सफर में बस भागता रहा ना देखा, पाँव में चप्पल है के नहीं | बुझी मशालों को […]

काली आधी रात में, दुनिया देख रही थी सपने | आलस का आलम था चहु ओर रात भी लग रही थी ऊंघने | तब मैंने छत से देखा, बतखो के झुण्ड को तलाब में | […]

स्वार्थी कुटिल लोगो पर ध्यान ना दो, जैसे बहता नदिया का नीर | विपरीत परिस्थिति में भी अडिग रहो, ना होना कभी अधीर | जो दुखी करें सबको ओर बने बड़ा ही वीर ऐसे दुष्टो […]

जब डगमगा जाये तेरा हौसला, अपने दिल को पत्थर समझ लेना | राम नाम लिखकर उसपर, दरिया में फेंक देना | जो होगा देखा जायेगा, राम नाम पे भरोसा कर लेना | कहना “हे राम […]

जीवन मेरा बहुत कठिन है, पर ना चाहूं मुड़कर देखना | रख ली है कुछ पुरानी यादे समेटकर, ना चाहूँ उनको फेंकना | झूठा मुखौटा लगाकर, क्यों चाहते हो, जज्बातों से यूँ खेलना | दिल […]

लोगो की नफरतो के आगे, खुद्दार कभी झुकता नहीं| अडचन चाहे कितनी भी आये, चलते चलते वो रुकता नहीं| महफिलों की रौनको से, फर्क उसे पड़ता नहीं| संघर्ष की मशाल लिए वो, भागता हुआ थकता […]

गुलामी की धांस में अत्याचारों की बांस में देश था बिलकुल सड़ गया | तब उठ खड़ा हुआ एक अहिंसक योद्धा, जो लाठी लिए फिरंगी से लड़ गया | कुचलता हुआ अंग्रेजी सरकार के इरादे, […]

प्रेयसी — तुम्हे मै प्यार करू या ना करू, ये है मेरी मर्ज़ी | तुम्हे मुझसे प्यार है तो, सिर्फ लगा सकते हो अर्जी | प्रेमी — सच्चा प्यार करता हूँ तुमसे, नहीं आशिक हूँ […]

सुनो आज तुम्हे सुनाऊ पानी की कहानी कीमती है पानी कहती थी मेरी नानी | कभी अमृत जैसा मीठा था मेरे गांव का ये पानी अब विषैला होता जा रहा हर घट- घट का पानी […]

काश ! देश का शासन कलम चलती, निर्दोष को न्याय दिलाती, और दोषी पर कहर बरसाती, काश !देश का शासन कलम चलाती | अन्याय का नाम ना होता, भ्रष्टाचार का काम ना होता, दुष्ट नेताओं […]

ये मौसम ऐसा आया है जिसकी हवाओं मे त्योहारों की खुशबू आती है | नई ख़ुशी और नई उमंगो का एहसास दिल मे जगती है | दीये की जलती जोत निश्चय दृढ़ बनती है | […]