मैंने सीख लिया

अपनी की गई गलतियों से
सबक लेके,
खुद की कमियों को
चिन्हित करना
मैंने सीख लिया ।
हासिल करने के लिए ख्वाबों का होना
जीने के लिए एक मक़सद होना
अपनी दुआओं में सबों को शामिल करना
जख्म देने वालों से भी मोहब्बत करना
मैंने सीख लिया ।
कोई कुछ भी कहे
चाहे अनगिनत शूल मिले
हर हाल में जीना है
अपने बच्चों के लिए
कही बातों को अनसुना करना
मैंने सीख लिया ।
कङवी यादों को दिल से
भुलाने की नाकाम कोशिश
बार-बार उभर आते हैं
रूठे रिश्तों की तपिश
मिले ज़ख्मों को सीना
मैंने सीख लिया ।
देखते- देखते कैसे
वक्त गुजरता गया
उलझनों का सिलसिला
कहीं थम न सका
एक के बाद दूसरी
मुश्किल होती खङी
हर हाल में डट के रहना
मैंने सीख लिया।

Comments

4 responses to “मैंने सीख लिया”

  1. वाह क्या बात है काश ये  हुनर 
    हमारे अंदर भी आ जाए

    1. Suman Kumari

      सादर धन्यवाद

  2. राकेश

    भाव पूर्ण रचना

    1. Suman Kumari

      सादर धन्यवाद

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