मैं और वो

चन्दन मेरा वजूद है लिपटे हुए हैं सांप ,
बेबस की ये दवा है क्या मीर किया जाये ….

गुलजार करने आया था वो बागबान मानिंद ,
गुलसन उजाड़ कर फिर वो मीर चल दिया ..

…atr

Comments

3 responses to “मैं और वो”

  1. राम नरेशपुरवाला

    वाह

  2. Satish Pandey

    Very nice

  3. Satish Pandey

    बहुत खूब

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