मैं खो गया हूँ कहीं, दुनिया की चमक में।
रोता है ख्वाब मेरा, अध-खुली सी पलक में।।
मैं खो गया हूँ कहीं
Comments
14 responses to “मैं खो गया हूँ कहीं”
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वाह वाह क्या बात है
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🙏🙏
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देखन मा छोटे लगें घाव करे गंभीर
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धन्यवाद प्रोफ़ेसर साहब
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Nice
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🙏🙏
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बहुत सुंदर
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👍🙏🙏
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Wah
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धन्यवाद
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👌👌
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🙏🙏
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Good
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बहुत खूब
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