मैं खो गया हूँ कहीं

मैं खो गया हूँ कहीं, दुनिया की चमक में।
रोता है ख्वाब मेरा, अध-खुली सी पलक में।।

Comments

14 responses to “मैं खो गया हूँ कहीं”

  1. वाह वाह क्या बात है

  2. देखन मा छोटे लगें घाव करे गंभीर

    1. धन्यवाद प्रोफ़ेसर साहब

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