5 Comments

  1. अति सुन्दर कल्पना है प्रज्ञा जी की ,”पी लो रानी! प्रेम का प्याला
    मैं चाँद निचोड़ के लाया हूँ”,वाह सुन्दरता और प्रेम की पराकाष्ठा ! लाजवाब..

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