मैं चाहती हूं…

मैं चाहती हूं ख्वाबो की पौड़ियों पर चढ़ना,
मगर पीछे से जिम्मेवारियों की रस्सी खींच रही है

Comments

14 responses to “मैं चाहती हूं…”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत सुंदर पंक्तियां
    अक्सर ऐसा ही होता है जिम्मेदारी का बोझ जिंदगी भर अपने लिए कुछ नहीं करने देता

    1. हार्दिक धन्यवाद सर

  2. जिम्मेदारियों के आगे ख़्वाहिशों की विशाद क्या
    कर्तव्यों की प्राथमिकता के आगे इन ख्वाबों की औकात क्या

    1. सुन्दर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद

  3. Geeta kumari

    ज़िम्मेदारी के चलते ख़्वाब पूरे ना कर पाने के दर्द का सटीक चित्रण किया है प्रतिमा जी…वाह

    1. सुन्दर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद

  4. Praduman Amit

    जीवन में जिसने धारा प्रवाह के रूख बदल दिया।
    उसे ही कामयाबी के घोड़े पर चढ़ने का मौका मिला।।

    1. Pratima chaudhary

      बहुत सुंदर सर ,धन्यवाद!

  5. Deep Patel

    जिम्मेदारियों से अब बदन टूटने सा लगा है,
    क्यूँ न ख्वाहिशों की अंगड़ाई ली जाए….

    1. बहुत सुंदर
      धन्यवाद

Leave a Reply

New Report

Close