मैं चाहती हूं ख्वाबो की पौड़ियों पर चढ़ना,
मगर पीछे से जिम्मेवारियों की रस्सी खींच रही है
मैं चाहती हूं…
Comments
14 responses to “मैं चाहती हूं…”
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बहुत सुंदर पंक्तियां
अक्सर ऐसा ही होता है जिम्मेदारी का बोझ जिंदगी भर अपने लिए कुछ नहीं करने देता-

हार्दिक धन्यवाद सर
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जिम्मेदारियों के आगे ख़्वाहिशों की विशाद क्या
कर्तव्यों की प्राथमिकता के आगे इन ख्वाबों की औकात क्या-

सुन्दर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद
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सुंदर
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धन्यवाद सर
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ज़िम्मेदारी के चलते ख़्वाब पूरे ना कर पाने के दर्द का सटीक चित्रण किया है प्रतिमा जी…वाह
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सुन्दर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद
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जीवन में जिसने धारा प्रवाह के रूख बदल दिया।
उसे ही कामयाबी के घोड़े पर चढ़ने का मौका मिला।।-

बहुत सुंदर सर ,धन्यवाद!
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जिम्मेदारियों से अब बदन टूटने सा लगा है,
क्यूँ न ख्वाहिशों की अंगड़ाई ली जाए….-

बहुत सुंदर
धन्यवाद
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सत्य बात
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धन्यवाद सर
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