मैं देख नहीं पाता हूं तो क्या?
महसूस करता हूं,
लोगों की खुशियां,
और उनके गम ।
वो जो देखकर भी नहीं करते।
इतना महसूस कर चुका हूं।
इस दुनिया को,
लोगों से कहीं बेहतर ।
मेरे नहीं देख पाने से भी,
इतनी सुंदर है दुनिया ।
मैं देख नहीं पाता हूं तो क्या!
मैं देख नहीं पाता हूं तो क्या!
Comments
18 responses to “मैं देख नहीं पाता हूं तो क्या!”
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अतिसुंदर
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धन्यवाद सर
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सुन्दर
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हार्दिक धन्यवाद सुमन जी
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अतिसुंदर
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धन्यवाद दीप जी
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आंखों से अपाहिज व्यक्ति की पीड़ा का बहुत यथार्थ परक एवं मार्मिक चित्रण
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हार्दिक धन्यवाद
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Very nice
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Thank you
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Bohot sunder!
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Thank you
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सुंदर पंक्तियाँ
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हार्दिक धन्यवाद
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Good
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Thank you
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Very nice
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बहुत बहुत धन्यवाद
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