मैं निर्दोष हूँ मैया

मैया यशोदा से लिपट के, हँस के बोले नंदलाला।
माखन कहाँ खाया है, तेरा सबसे दुलारा नंदलाला ।।
दोष लगाना कान खिंचवाना, यही सभी को भाता है।
बाल सखा से पूछ ले मैया, कहाँ था तेरा नंदगोपाला।।
मैया – सारा दिन भाग रहा था मैं, गैया के पीछे पीछे।
फिर कैसे दोष दे रही है, ब्रज के समस्त ब्रजवाला ।।
झूठ के खेती करने आ पहुँचे है, समस्त ब्रजवासी।
कहना मान ले मैया, सच कहता है तेरा कन्हैया लल्ला।।

Comments

10 responses to “मैं निर्दोष हूँ मैया”

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद महोदय।

  1. Satish Pandey

    बहुत खूब

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया मेहरबान

    1. Praduman Amit

      आपकी समीक्षा ही मेरी शान है।

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद महाशय।

    1. Praduman Amit

      आपकी समीक्षा ही, मेरी कलम मे शक्ति प्रदान करती है।

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