मोहब्बतें -इकरार कर ना सके
हम हाले दिल बयां उनको कर ना सके
वो आए थे हमारे गलियों में
हम दरवाजा भी उस वक्त खोल ना सके
वो आवाजें हमें लगाते रहे
हम एक दफा उनको सुन ना सके
वो रख गए कुछ तोहफ़े दर पर
हम जाकर उनको खोलना सके
वह हम से नजरें मिलाते रहे
हम उनसे नजरें मिला ना सके
वो धकनों में आहट देते गए
हम जाकर उनको खोल ना सके
वो इश्के ख़त बोलते गए
हम उसके खत लिख ना सके
वो सामे चाय पर इंतज़ार किए
हम उस टपरी पर जा ना सके
वो सफ़र में आगे जाने लगे
हम एक दफा उनको रोक ना सके
वह बरसाते – राते चले गए
हम अफ्ताबे- सुबह खोज ना सके
On by storyteller manju
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