जय-जय शिव शंकर
सर्दी हुई भयंकर
जय-जय बम भोले,
गिरने लगे हैं ओले
आई तेजी से बरखा रानी,
झमाझम बरसा पानी
सर्दी से कांपे है तन,
निकला सा जाता है दम
ऐसे मौसम में हाए
गरम चाय बड़ी सुहाए
______✍️गीता
मौसम
Comments
6 responses to “मौसम”
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वाह बहुत खूब
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सादर आभार भाई जी🙏
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ठंड में चाय की जरूरत को बहुत खूबसूरती से प्रस्तुत लिया गया है। अति उत्तम रचना
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आपकी दी गई सुन्दर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
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बहुत खूब
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बहुत-बहुत धन्यवाद सर
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