यदि कभी तुम प्यार की

यदि कभी तुम प्यार की
बिल्डिंग बनाओ तो मुझे
अस्ल पर रख देना तब
इत्माम पाओगे।
क्योंकि मैं ही हूँ वो जो
अधिकारिणी हूँ प्यार की
त्याग कर मुझको कई
इल्जाम पाओगे।

Comments

16 responses to “यदि कभी तुम प्यार की”

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  1. Pratima chaudhary

    बहुत खूब

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  2. Vasundra singh Avatar

    सुन्दर भावपूर्ण काव्य

    1. Satish Pandey

      सादर आभार जी

  3. बहुत जबरदस्त

    1. Satish Pandey

      बहुत सारा धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  4. Geeta kumari

    वाह, बहुत ख़ूब

    1. Satish Pandey

      सादर आभार आदरणीया

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