यदि कभी तुम प्यार की
बिल्डिंग बनाओ तो मुझे
अस्ल पर रख देना तब
इत्माम पाओगे।
क्योंकि मैं ही हूँ वो जो
अधिकारिणी हूँ प्यार की
त्याग कर मुझको कई
इल्जाम पाओगे।
यदि कभी तुम प्यार की
Comments
16 responses to “यदि कभी तुम प्यार की”
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वाह वाह
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सादर धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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सादर धन्यवाद
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सुन्दर भावपूर्ण काव्य
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सादर आभार जी
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बहुत जबरदस्त
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बहुत सारा धन्यवाद
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बहुत सुंदर
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सादर धन्यवाद
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बहुत खूब
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बहुत धन्यवाद
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सुन्दर
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सादर धन्यवाद जी
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वाह, बहुत ख़ूब
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सादर आभार आदरणीया
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