यह क्या हो गया

यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ नकाब ही नकाब है।
यह कैसा मातम आज शायरो पे आया है।।
ना नज्म है ना ग़ज़ल है ना नातशरीफ है।
मौसम भी कुछ कुछ शायरों से ख़फा है।।
गुलशन में भी गुल खिलना भूल गया है ।
ए नकाब इतनी कयामत भी अच्छी नहीं है।।

Comments

6 responses to “यह क्या हो गया”

  1. Pratima chaudhary

    सुन्दर प्रस्तुति

  2. Satish Pandey

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  3. अतिसुंदर रचना

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सुन्दर प्रस्तुति

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