बचपन साथ बहारें देखें
बड़े हुए बंटवारें देखें
फिर आँगन में धुप ना आयी
आँखे अब दीवारें देखें
चल फिर रेत के महल बनायें
और नदियों की धारें देखें
मंदिर में तो मिला नहीं रब
चल बच्चों को पुकारें, देखें
चल भाई अब गले मिलें हम
उम्र हुई तकरारें देखे
कत्ल हुआ तब बंद थीं लेकिन
खुलती खिड़की सारे देखें
कभी छाया कभी छाता बाबा
बारिश , गर्मी, जाड़ें देखें
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