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  1. कवि सतीश जी की इस कविता में , किसी पुराने मित्र को मनाती हुई बहुत सुंदर पंक्तियां हैं । इंसान से गलतियां भी हो जाती है इस बात का भी ज़िक्र किया है और नफरत ना करने की गुजारिश भी की है। कोमल भावनाओं से सुसज्जित सुंदर रचना

    1. इस बेहतरीन समीक्षा और उत्साहवर्धन हेतु, आपका हार्दिक धन्यवाद गीता जी, आपने कविता के भाव का जिस खूबसूरती से विश्लेषण किया है वह अद्वितीय है।

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