6 Comments

  1. वर्तमान की दुविधाएं और परिस्थितियों का बखूबी वर्णन करती हुई प्रज्ञा जी की बहुत सुन्दर रचना है । इस घोर कलयुग मे श्री राम को याद करती हुई सुंदर कथ्य और शिल्प के साथ बहुत भाव पूर्ण कविता

  2. राम राज्य में राम जैसे दया निधान थे परंतु कलयुग में तो हर तरफ रावण की रावण है पहले हम स्वयं राम बने फिर राम राज भी आएगा ऐसा मेरा मानना है

    1. जी बिल्कुल परंतु
      यदि हम एक इंसान भी बन जाए और मानवीय गुण दिखाएं तो भी समाज का कल्याण हो जाएगा

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