ये कैसी ज़िद

हर एक कश के साथ धुंए में अपनी ज़िन्दगी उड़ाते हैं,
देखो आजकल के मनचले कैसे अपने कदम भटकाते हैं,

पाते हैं कितने ही संस्कार अपने घरों से मगर,

हर सिगरट के साथ वो रोज उनका अंतिम संस्कार कर आते हैं,

जिस दिन हो जाती हैं खत्म उनकी ज़िन्दगी की साँसे,

वही सिगरट की राख वो अपनी चिता में पाते हैं॥

राही (अंजाना)

Comments

2 responses to “ये कैसी ज़िद”

  1. Manjulika Nath Avatar
    Manjulika Nath

    बहुत खूब राही जी

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

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