ये वो कली है जो अब मुरझाने लगी है..

कश्तियाँ समंदर को ठुकराने लगी है..
तुमसे भी बगावत की बू आने लगी है..

मत पूछिए क्या शहर में चर्चा है इन दिनों..
मुर्दों की शक्ल फिर से मुस्कुराने लगी है..

मैं सोचता हूँ इन चबूतरों पे बैठ कर..
गलियाँ बदल-बदल के क्यूँ वो जाने लगी है..

गुजरे हुए उस वक़्त की बेशर्मी मिली थी कल..
वो आज की हया से भी शर्माने लगी है..

किस चीज को कहूँ अब इंसान बताओ..
ये वो कली है जो अब मुरझाने लगी है..

-सोनित

Comments

10 responses to “ये वो कली है जो अब मुरझाने लगी है..”

    1. Sonit Bopche Avatar
      Sonit Bopche

      thank you manohar bhai.

    1. Sonit Bopche Avatar
      Sonit Bopche

      thank you anupriya ji

  1. Anil Goyal Avatar
    Anil Goyal

    बहुत अच्छे

    1. Sonit Bopche Avatar
      Sonit Bopche

      thanks anil bhai

    1. Sonit Bopche Avatar
      Sonit Bopche

      thanks sridhar ji

  2. राम नरेशपुरवाला

    Wah

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