4 Comments

  1. कवि सतीश जी द्वारा प्रस्तुत आज काल के वातावरण का दोहा रूप में बहुत ही सुव्यवस्थित तरीके से किया गया यथार्थ चित्रण । लाजवाब अभिव्यक्ति

  2. कुछ मात्रात्मक कमियां रह जाने के दृष्टिगत मेरे द्वारा यह दोहा कविता डिलीट कर दी गयी है, पुनः सुधार कर प्रस्तुत की जायेगी

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